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पंजाब यूनिवर्सिटी में वायु प्रदूष् ण को लेकर सेमिनार

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वायु प्रदूषण से निपटने के लिए अमेरिका से लेनी होगी सीख
सबहेड
पंजाब यूनिवर्सिटी में आयोजित सेमिनार में वक्ताओं ने रखे अपने विचार

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। वायु प्रदूषण से निपटने के लिए हमें अमेरिका से सीख लेनी चाहिए। यह बात वीरवार को पीयू के डिपार्टमेंट ऑफ इन्वायरमेंट स्टडीज में ‘कॉलोक्वियम ऑन एयर पॉल्यूशन इन इंडिया-लर्निंग फ्राम यूएस’ सेमिनार में वक्ताओं ने कहीं। यह सेमिनार स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ, डिपार्टमेंट ऑफ कम्यूनिटी मेडिसिन पीजीआई के सहयोग से आयोजित किया गया। सेमिनार में वर्ल्ड एयर एक्सपर्ट प्रोफेसर जेम्स शॉयर मुख्य वक्ता थे जबकि इसाबेला डेटवेलर, उपमंत्री काउंसिलर अमेरिकी दूतावास और क्रिस्टोफर, वैज्ञानिक अधिकारी, पर्यावरण विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भी भाग लिया। एस नारायणन, सदस्य सचिव, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण और टीसी नौटियाल, सदस्य सचिव चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति ने वायु गुणवत्ता नीतियों और क्रियान्वयन पर चर्चा की। पीईसी से डॉ. सिबी जॉन, डॉ. मनोज राजे और आईएमटेक से डॉ. चौधरी, पर्यावरण विभाग हरियाणा के डॉ. राधेश्याम शर्मा और चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति के विवेक पांडे ने भाग लिया। उन्होंने क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में सुधार पर चर्चा की।
प्रोफेसर जेम्स शॉयर ने हाइलाइट किया कि यूएसए के पास वायु प्रदूषण को मापने के लिए राष्ट्रव्यापी निगरानी साइटें हैं और यूएस पर्यावरण संरक्षण एजेंसी उस डेटा का उपयोग करती है। साथ ही सुनिश्चित करती है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय वायु मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं। उन्होंने जोर दिया कि भारत नियंत्रण घनत्व तैयार करने के लिए डेटा उत्पन्न करने के लिए जनसंख्या घनत्व के आधार पर उच्च घनत्व वाले वायु गुणवत्ता नेटवर्क की योजना बना सकता है। उन्होंने स्वास्थ्य जोखिम अध्ययनों के लिए वायुमंडलीय रसायन उपकरण और ज्ञान को एकीकृत करने का भी सुझाव दिया। डॉ. सुमन मोर ने उल्लेख किया कि संयुक्त समिति बनाने की आवश्यकता है और समय-समय पर वायु गुणवत्ता में कमी की रणनीतियों और समिति की सिफारिश की योजना बनाने के लिए विभिन्न हित धारकों को शहर के अधिकारियों के प्राथमिक एजेंडे पर होना चाहिए।
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वहीं डॉ रविंद्र खैवाल ने शहर के विशिष्ट स्रोत की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. मनोज राजे ने कहा कि वायु प्रदूषण के लिए जैव स्रोतों के अनुपात का आकलन करने की आवश्यकता बताई। आईएमडी के निदेशक सुरिंदर पाल ने उल्लेख किया कि मौसम पूर्वानुमान पूर्वानुमान वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान प्रणाली के साथ बेहतर एकीकृत किया जा सकता है। इस मौके पर 100 से अधिक छात्रों ने भाग लिया।
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