गूगल कांड में जांच शुरू, प्रिंसिपल से पूछताछ
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
गूगल में हर्षित को नौकरी के मामले की तह तक पहुंचने के लिए अब जांच शुरू हो गई है। शिक्षा विभाग की ओर से गठित की गई जांच कमेटी के सामने बुधवार को स्कूल की प्रिंसिपल से पूछताछ की गई। कमेटी जल्द ही पब्लिक रिलेशन डिपार्टमेंट, स्कूल टीचर्स व स्कूल के पीआरओ को भी पूछताछ के लिए बुलाएगी। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में सभी स्तरों पर लापरवाही के साथ काफी किरकिरी भी हुई है। इससे आला अधिकारी खासे नाराज हैं।
जीएमएसएसएस - 33 की प्रिंसिपल इंदिरा बेनीवाल ने बुधवार को डीएसई के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखा है। अपनी रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि हर्षित के पैरेंट्स ने बताया था कि उनके बेटे का चयन गूगल में ग्राफिक्स डिजायनर के तौर पर हुआ है। वे सरपंच से सम्मानित होती हर्षित की फोटो भी लाए थे। यही नहीं हर्षित ने भी स्कूल में आकर टीचर को गूगल का नियुक्ति पत्र दिखाया था। आईटी के बच्चों को प्रोत्साहित करने के मकसद से गूगल के नियुक्ति पत्र को शिक्षा विभाग को भेज दिया था। इसमें यदि कुछ भी फर्जीवाड़ा हुआ है तो हर्षित के पैरेंट्स ही बता सकते हैं। उधर, मामले के बाद से हर्षित का फोन बंद आ रहा है। मोबाइल की आखिरी लोकेशन गुड़गांव में थी।
चंडीगढ़ शिक्षा विभाग के डायरेक्टर स्कूल एजूकेशन रूबिंदर जीत सिंह बराड़ ने बताया कि अभी मामले की जांच चल रही है। सभी तथ्यों पर जांच की जाएगी। पता किया जाएगा कि हर्षित के साथ गूगल कंपनी के नाम पर कैसे धोखाधड़ी हुई है। साथ ही इसकी भी जांच की जाएगी कि प्रशासन के डायरेक्टर पब्लिक रिलेशन ने बिना पड़ताल किए कैसे प्रेस रिलीज जारी कर दी। इसमें जिसकी भी लापरवाही होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि यूटी शिक्षा विभाग ने विज्ञप्ति जारी कर दावा किया था कि गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर- 33 से 12 वीं पास छात्र हर्षित को गूगल ने 1.44 करोड़ के सालाना पैकेज पर नौकरी दी है। चयन 29 जुलाई को किया गया था।