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स्ट्रीट लाइट के खुले बॉक्स से खतरा-ए जान, निगम अभी अनजान
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गोविंद परवाना
मनीमाजरा।
मनीमाजरा बस स्टैंड पर स्ट्रीट लाइट के पोल का खुला बॉक्स जहां एक नाबालिग की जिंदगी पर भारी पड़ गया, वहीं अभी लापरवाह निगम कर्मियों ने इस संदर्भ में कोई कदम नहीं उठाए हैं। मनीमाजरा में अभी कई जगह ऐसे ही स्ट्रीट लाइट के बॉक्स खुले हैं। वहीं नाबालिग का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों के हवाले कर दिया गया है। हादसे के बाद रविवार को अमर उजाला की टीम ने मनीमाजरा सिविल अस्पताल का मुआयना किया। वहां भी स्ट्रीट लाइटों के बॉक्स टूटे हुए थे और बिजली के तार जमीन पर खुले बिखरे पड़े थे। वहां लगे करीब सभी बॉक्स टूट चुके थे। उनकी खुली तारों पर निगम कर्मचारियों ने प्लॉस्टिक टेप तो लगाई है, मगर यहां की हालत देखकर लगता नहीं कि चंडीगढ़ निगम को लोगों की जान की परवाह तक नहीं है।
पीजीआई ने दिया जवाब तो बालू में दबा दिया शव
मृतक सोनू (17) के दोस्त ने बताया कि पीजीआई में मौत की जानकारी मिलने के बाद सोनू के परिजनों को किसी ने बताया कि बालू में शव रखने से बिजली के करंट का असर खत्म हो जाता है। इसके बाद परिजनों ने शव को करीब 4 घंटे बालू में दबाया। बाद में पुलिस टीम ने शव को अपने कब्जे में लिया।
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परिजनों ने लगाए रिपोर्ट न देने का आरोप
पीड़ित परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने जबरन उनकी इच्छा के बिना ही शव का पोस्टमार्टम करवा दिया। पहले पुलिस टीम ने कहा कि रिपोर्ट शाम तक आ जाएगी पर पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने 5 महीने बाद रिपोर्ट आने की बात कही।
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एसडीओ ने फोन नहीं उठाया, मेयर मीटिंग में व्यस्त
इस संबंध में जब एसडीओ संजीव कुमार को फोन किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। इसके बाद मेयर आशा जसवाल को फोन किया गया तो कॉल रिसीव करने वाले व्यक्ति ने बताया कि मैडम मीटिंग में व्यस्त हैं।
मनीमाजरा सिविल अस्पताल के बाहर कई पोल के बॉक्स अभी खुले
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