एक्शन प्लान तैयार, पहले साल वायु प्रदूषण को 20 से 25 प्रतिशत कम करने का लक्ष्य
चंडीगढ़ प्रदूषण कंट्रोल कमेटी ने एडवाइजर को सौंपा एक्शन प्लान
छह महीने के भीतर लागू करना होगा, लागू नहीं हुआ तो एडवाइजर की होगी जिम्मेदारी
आशीष वर्मा
चंडीगढ़। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश के बाद चंडीगढ़ प्रदूषण कंट्रोल कमेटी ने वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए एक्शन प्लान तैयार कर एडवाइजर को सौंप दिया है। एडवाइजर से मुहर लगते ही प्लान को 31 दिसंबर तक केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पास जमा करना है। एनजीटी की ओर से हरी झंडी मिलते ही इस प्लान को छह महीने के भीतर लागू करना होगा। प्लान के तहत पहले साल वायु प्रदूषण को करीब 20-25 प्रतिशत नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है। एनजीटी ने अक्तूबर में मीडिया रिपोर्ट को आधार मानकर चंडीगढ़ सहित 102 शहरों को एयर क्वालिटी को मेन्टेन करने के लिए एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए थे। ये वे शहर हैं, जो एयरक्वालिटी के राष्ट्रीय मानक को मेन्टेन नहीं कर पा रहे थे। चंडीगढ़ का एयर क्वालिटी इंडेक्स कभी बढ़ता है तो कभी घटता है। खासकर सर्दियों और दीपावली के वक्त चंडीगढ़ की हवा खराब होती है।
एक्शन प्लान के मुख्य बिंदु
ट्रैफिक लाइट पर ज्यादा देर तक गाड़ियां न खड़ी हों
एक्शन प्लान में ट्रैफिक कंजेशन को कम करने पर जोर दिया गया है। कई जगह 100 सेकेंड की रेड लाइट है। इससे देर तक गाड़ियां खड़ी होती हैं और इस स्थिति में ज्यादा प्रदूषण फैलता है। इसमें ट्रैफिक लाइट को 40 सेकेंड तक करने और जाम की स्थिति में ट्रैफिक को मैन्युअल कंट्रोल करने का प्लान है।
सड़कों से धूल को कम करना
देखा गया है कि चंडीगढ़ में सबसे ज्यादा पाल्यूशन धूल की वजह से है। पेरीफेरी की कई ऐसी सड़के हैं, जो टूटी हैं और उस पर ट्रैफिक होने से धूल ज्यादा उड़ती हैं। कुछ ऐसी भी सड़के हैं, जहां किनारे पर धूल की परतें जमा हैं। इसे दूर करने के लिए समय-समय पर सड़कों की धुलाई और टूटी सड़कों को जल्द से जल्द मरम्मत करने का प्लान है।
सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा
वायु प्रदूषण को लगाम कसने के लिए सबसे जरूरी है कि डीजल से चलने वाहनों की संख्या कम की जाए। सीटीयू की लगभग सभी बसें डीजल से चलती हैं और इससे सबसे ज्यादा प्रदूषण होता है। एक्शन प्लान में सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रमोट करने का प्रावधान रखा गया है।
भवन निर्माण और तोड़फोड़ से निकले मलबे का सख्ती से प्रबंधन
चंडीगढ़ और आसपास के इलाकों में धड़ल्ले से निर्माण कार्य हो रहे हैं। इसमें धूल के कण काफी सूक्ष्म होते हैं, जो वायु प्रदूषण को बढ़ाने का काम करते हैं। साल 2016 में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भवन निर्माण और तोड़फोड़ से निकले मलबे के प्रबंधन के नियम को अधिसूचित किया है। इसमें साफ-साफ निर्देशित किया गया है कि यदि कहीं निर्माण कार्य या तोड़फोड़ कार्य हो रहा है तो उससे उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए पानी का छिड़काव व भवन को ढक कर रखना है। बराबर पानी का छिड़काव करते रहना है, जिससे धूल न उड़ सके, लेकिन चंडीगढ़ में नगर निगम इस अधिनियम को फिलहाल लागू नहीं कर पाई है।
एक्शन प्लान की जिम्मेदारी एडवाइजर की होगी
एनजीटी ने अपने निर्देश में साफ कहा है कि एक्शन प्लान को लागू करने की जिम्मेदारी सीधे तौर पर एडवाइजर की होगी। यदि एक्शन प्लान सही तरीके से लागू नहीं हुआ तो उसकी जिम्मेदारी एडवाइजर की मानी जाएगी। एक्शन प्लान में प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों की जानकारी देनी होगी और उससे निपटने, मॉनीटरिंग और जागरूकता पर उठाए जाने वाले कदमों का उल्लेख करना होगा।
ऊपर-नीचे होता है रहता चंडीगढ़ का एयरक्वालिटी इंडेक्स
दीपावली के बाद से चंडीगढ़ का एयरक्वालिटी इंडेक्स गड़बड़ाने लगता है। शुक्रवार को शनिवार को हवा की गुणवत्ता नापने का सूचकांक 124 के आसपास दर्ज किया, जिसे 50 से ज्यादा नहीं होना चाहिए था। चंडीगढ़ में दीपावली और सर्दियों में एयरक्वालिटी इंडेक्स 300 के पार चला जाता है। हालांकि, चंडीगढ़ की हवा दूसरे शहरों के मुकाबले काफी बेहतर है, लेकिन सिटी ब्यूटीफुल के लिहाज से यह चिंताजनक है। जैसे-जैसे तापमान नीचे आएगा, शहर में वायु प्रदूषण का स्तर खराब होने लगेगा।
क्या होता है एयर क्वालिटी इंडेक्स
यह आठ मापदंडों पर आधारित होता है, जो हवा की गुणवत्ता नापने का सूचकांक बताता है। इसमें पीएम-10, पीएम 2.5, नाइट्रोजन आक्साइड, सल्फर डाई आक्साइड, कार्बनमोनो आक्साइड, ओजोन, अमोनिया और लेड शामिल होगा। एयर क्वालिटी इंडेक्स यदि 0-50 का मतलब अच्छी गुणवत्ता, 51-100 संतोषजनक स्थिति, 101-200 मध्यम प्रदूषित, 201-300 कमजोर गुणवत्ता, 301-400 गंभीर स्थिति, 401-500 बेहद गंभीर स्थिति।
क्या होता है पीएम
पीएम 2.5 प्रदूषण में शामिल वह सूक्ष्म संघटक है, जिसे मानव शरीर के लिए सबसे ख़तरनाक माना जाता है। पीएम यानी पार्टिकुलेट मैटर प्रदूषण की एक किस्म है। इसके कण बेहद सूक्ष्म होते हैं, जो हवा में बहते हैं। पीएम 2.5 व पीएम 10 हवा में कण के साइज को बताता है। आम तौर पर हमारे शरीर के बाल पीएम 50 के साइज के होते हैं। इससे आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पीएम 2.5 कितने बारीक कण होते होंगे। 24 घंटे में हवा में पीएम 2.5 की मात्रा 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होनी चाहिए। इससे ज्यादा होने पर स्थिति खतरनाक मानी जाती है। हवा में मौजूद यही कण हवा के साथ हमारे शरीर में प्रवेश कर खून में घुल जाते है। इससे शरीर में कई तरह की बीमारी जैसे अस्थमा और सांसों की दिक्कत हो सकती है। बच्चे, गर्भवती महिलाएं और सीनियर सिटीजन के लिए यह स्थिति ज्यादा खतरनाक होती है।