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कॉलेज पढ़ने गईं तो पिता ने घर से निकाला, बुआ ने साथ दिया तो पूरी हुई पीएचडी

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चंडीगढ़। महिलाओं के लिए भले ही शिक्षा के दरवाजे खोल दिए गए हों, लेकिन पुरानी परंपराओं से अभी भी तमाम गांव नहीं उबर पाए। वह बेटियों को कॉलेज भेजना पसंद नहीं करते। उसी में एक हैं रोपड़ के गांव रंगीलपुर की डॉ. सोनिया। पिता ने उन्हें कॉलेज जाने पर घर से बाहर निकाल दिया, लेकिन पढ़ाई की ललक ने उन्हें सोने नहीं दिया। बुआ के घर पढ़ाई कर आज पीएचडी कर ली और वह बीबी सरनकौर खालसा कॉलेज चंपकौर साहिब में शिक्षिका के पद पर तैनात हैं।
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डॉ. सोनिया कहती हैं कि कॉलेज में वह पिता के अनुमति के बगैर पहुंचीं तो उन्होंने घर से निकाल दिया। पिता का कहना था कि समाज के लोग क्या सोचेंगे। सभी लड़कियां घर में रहती हैं। इसलिए कॉलेज आज के बाद नहीं जाना, लेकिन सोनिया नहीं मानी। वह बुआ के घर रोपड़ पहुंच गई और वहां पढ़ाई की। पीयू से वर्ष 2013 में पीएचडी शुरू की। उन्होंने रिसर्च का विषय भी यही चुना। कहती हैं कि समाज में औरतों की पहचान दबाई जाती है। पिता, पति और बेटे उन्हें आगे नहीं बढ़ते देखना चाहते। इसलिए इसी विषय को रिसर्च के लिए चुना। उन्होंने बताया कि उनके गांव की वह पहली लड़की हैं जिन्होंने पीएचडी हासिल की है।

संघर्ष के बलबूते डॉ. शालिनी ने की रिसर्च
डॉ. शालिनी वासन ने संघर्ष के बलबूते पीएचडी हासिल की है। सीसीईटी कॉलेज में वह नौकरी कर रही हैं। कहती हैं कि लाइब्रेरी की वेबसाइट की वेल्यू सेट करने पर शोध किया है। पति से तलाक होने के बाद पूरा जिम्मा संभाला और बेटी को पढ़ाया। कहती हैं कि रिसर्च तीन साल में पूरा हुआ। इस काल में एक्सीडेंट भी हुआ लेकिन रिसर्च प्रभावित नहीं होने दिया।
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