पीपीपी मॉडल का विरोध करेगी चंडीगढ़ की आवाज पार्टी
कैप शिक्षकोें के हित के लिए करेगी संघर्ष : अविनाश सिंह शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। शहर के सरकारी विद्यालयों की प्राइमरी स्तर की कक्षाओं में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए एक प्रस्ताव के तहत पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से सरकारी विद्यालयों को निजी संस्थाओं और ट्रस्ट को देने का फैसला लगभग तय है। इस प्रस्ताव पर आगामी 14 फरवरी को एडवाइजरी काउंसिल की मीटिंग में चर्चा होनी है। अध्यापकों ने 14 फरवरी को एडवाइजरी काउंसिल की मीटिंग में इस मुद्दे के पास होने पर विरोध करने का निश्चय किया है और चंडीगढ़ की आवाज पार्टी अध्यापकों का पूर्ण समर्थन करेगी।
इस प्रस्ताव के मुद्दे पर और शिक्षा के क्षेत्र में आ रही कठिनाइयों संबंधित सरकारी स्कूल के अध्यापकों का एक शिष्टमंडल अविनाश सिंह शर्मा, लोकसभा उम्मीदवार चंडीगढ़ की आवाज पार्टी (कैप) से उनके निवास स्थान पर मिला। अध्यापकों ने इस बात से नाराजगी जताई कि शिक्षा के क्षेत्र में चंडीगढ़ प्रशासन इतना बड़ा कदम उठाने जा रही है और इस मुद्दे पर सरकार ने उनके किसी भी प्रतिनिधि को इस चर्चा में शामिल नहीं किया। ज्यादातर अध्यापकों ने स्कूल का पूर्ण प्रबंधन निजी संस्थान को देने पर आपत्ति जताई।
अविनाश सिंह शर्मा ने कहा कि अध्यापकों से बात करने पर पता चला है कि चंडीगढ़ में शिक्षा के गिरते स्तर के लिए सरकारी विद्यालयों में बच्चों के अनुपात में अध्यापकों की कम जिम्मेदार है। आज से 15-20 साल पहले चंडीगढ़ के स्कूल भारत में शिक्षा के स्तर पर नंबर एक थे परंतु लगातार बढ़ती जनसंख्या के अनुपात में अध्यापकों की कमी और काम के बोझ के कारण, शिक्षा का स्तर गिरने से ये नार्थ जोन में ही सब से निचले स्तर पर आ गए हैं।