अलीगढ़ समेत अन्य केंद्र
-----------------------------------
मुख्य खबर
फोटो समेत
पूर्व एसपी देशराज को तीन साल की सजा
सबहेड
छह साल पुराने एक लाख रुपये की रिश्वत मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने सुनाया फैसला
कोर्ट ने एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया, इंस्पेक्टर के खिलाफ इंक्वायरी में राहत देने को मांगे थे पांच लाख
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सीबीआई की विशेष अदालत ने शुक्रवार को पूर्व एसपी देशराज को एक लाख रुपये की रिश्वत लेने के मामले में तीन साल की सजा सुना दी। अदालत ने देशराज को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13 (2) आर/डब्ल्यू 13 (1) (डी) के तहत दोषी करार देते हुए एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। हालांकि तीन साल की सजा होने पर अदालत से ही दोषी को जमानत मिल गई।
बता दें कि देश में अपनी तरह के इस पहले मामले में सीबीआई ने एक आईपीएस को ट्रैप कर एक लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा था। खास बात यह थी कि शिकायतकर्ता खुद पुलिस डिपार्टमेंट का ही एक इंस्पेक्टर था, जिसके खिलाफ चल रही जांच में राहत देने के नाम पर उससे रिश्वत मांगी गई थी।
आईआईटी कानपुर से एमटेक टॉपर देशराज वर्ष 2008 में आईपीएस बना था। देशराज को एजीएमयू कैडर मिला था। 18 अक्तूबर 2012 को सीबीआई ने चंडीगढ़ में तत्कालीन एसपी रहे देशराज को इंस्पेक्टर अनोख सिंह की शिकायत पर उनके सेक्टर-23 स्थित सरकारी आवास से एक लाख रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। यह रकम इंस्पेक्टर अनोख सिंह के खिलाफ चल रही विभागीय जांच में उसे राहत देने की एवज में मांगी गई थी। हालांकि देशराज ने पहले अनोख सिंह से पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी लेकिन बाद में सौदा दो लाख रुपये में तय हुआ। इसकी पहली किश्त के तौर पर एक लाख रुपये देने की बात तय हुई थी, जिसकी शिकायत अनोख सिंह ने सीबीआई से कर दी। शिकायत की पुष्टि होने पर सीबीआई ने ट्रैप लगाकर एसपी देशराज को एक लाख रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।
बाक्स
बच्चों और पत्नी की बीमारी की दलील देकर की थी सजा में नरमी की अपील
सजा सुनाए जाने से पहले देशराज ने अदालत से कहा कि वह अपने परिवार में कमाने वाला इकलौता शख्स है। उसकी नौ साल की बेटी का बायां हाथ खराब है और बेटा गंभीर बीमारी से पीड़ित है। इसके अलावा उसकी पत्नी भी डायबटीज की मरीज है। उसकी गैरमौजूदगी में उसके परिवार को देखने वाला कोई नहीं है। ऐसे में अदालत उसके प्रति नरमी बरतते हुए उसे कम से कम सजा सुनाए।
सीबीआई वकील ने कहा, सोसाइटी को मैसेज देने के लिए सख्त सजा जरूरी
सीबीआई की ओर से सरकारी वकील केपी सिंह ने अदालत से अपील की कि दोषी उस वक्त आईपीएस था और एसपी था। वह चंडीगढ़ पुलिस का चेहरा था। उसकी जरूरतों से अधिक उसकी सैलरी थी। करप्शन आज हमारे सोसायटी में कैंसर की तरह बन गया है। ऐसे में अगर दोषी को सख्त सजा नहीं दी गई तो सोसायटी और उनके जूनियर अफसरों को अच्छा मैसेज नहीं जाएगा इसलिए लिए दोषी को सख्त से सख्त सजा देनी चाहिए ताकि समाज में एक अच्छा मैसेज जाए।
कोट
राहत की बात यह है कि देशराज को जेल नहीं भेजा गया। अदालत के इस आदेश के खिलाफ हम हाईकोर्ट में अपील करेंगे। उम्मीद है कि वहां देशराज बरी होंगे।
-विशाल गर्ग नरवाना, एडवोकेट बचाव पक्ष
टाइमलाइन
18 अक्तूबर 2012 : सीबीआई ने आईपीएस एसपी देशराज को सेक्टर-23 स्थित सरकारी आवास से एक लाख रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया
12 दिसंबर 2012 : देशराज को हाईकोर्ट से जमानत मिली
05 जुलाई 2013 : सीबीआई को गृह मंत्रालय से केस चलाने की अनुमति मिली
07 जुलाई 2013 : सीबीआई ने चार्जशीट फाइल की
14 अक्तूबर 2013 : देशराज के खिलाफ आरोप तय
14 फरवरी 2014 : इंस्पेक्टर अनोख सिंह ने देशराज के खिलाफ गवाही दी
30 जुलाई 2018 : ट्रायल समाप्त
8 अगस्त 2018 : देशराज दोषी करार
10 अगस्त 2018 : अदालत ने तीन साल की कैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई