16 महीने बाद वसीम को मिली जमानत
सेक्टर-29 ऑटो गैंगरेप मामले में पुलिस ने किया था गिरफ्तार
तीन बार पहले जमानत याचिका हो चुकी थी खारिज
मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
कॉल सेंटर में काम करने वाली एक युवती से गैंगरेप के मामले में पिछले 16 महीने से बुड़ैल जेल में बंद वसीम मलिक को आखिरकार सोमवार को जिला अदालत से जमानत मिल ही गई। इससे पहले उसकी दो बार जिला अदालत से और एक बार हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। अदालत ने उसे 50 हजार रुपये के बेल बॉन्ड पर जमानत के आदेश दिए हैं। फिलहाल सोमवार को बेल बॉन्ड जमा नहीं हो पाए। मंगलवार को बेल बॉन्ड जमा होने के बाद शाम को वह बुड़ैल जेल से बाहर आ सकेगा।
इससे पहले वसीम मलिक के वकील अंकुर चौधरी ने 15 मार्च को जमानत याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि अब जब केस में दोनों आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं तो ऐसे में उसे जमानत दे दी जाए। जमानत याचिका दायर करने के बाद मामले में सात बार सुनवाई हुई। सोमवार को आखिरकार वसीम को अदालत ने राहत मिल ही गई।
सूत्रों के अनुसार वसीम मलिक की जमानत इसी गैंगरेप में गिरफ्तार मुख्य आरोपी मोहम्मद इरफान के साथी कमल हसन उर्फ दिल दिल की डीएनए रिपोर्ट पर टिकी हुई थी। सूत्रों के अनुसार पुलिस द्वारा कमल हसन की डीएनए रिपोर्ट पीड़िता से मैच हो गई है। हालांकि पुलिस अधिकारी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि करने से बच रहे हैं। इसके बाद ही वसीम मलिक को जमानत मिल पाई है।
यह है मामला
12 दिसंबर, 2016 को कॉल सेंटर में काम करने वाली युवती के साथ ऑटो चालक और उसके साथी ने सामूहिक दुराचार किया था। उसने सेक्टर-34 से घर जाने के लिए ऑटो लिया था। ऑटो में चालक और उसका साथी मौजूद था। दोनों ने चाकू के दम पर वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने पीड़ित के बयान पर एक आरोपी का स्कैच बनाया था। इसके आधार पर पुलिस ने आरोपी वसीम मलिक को गिरफ्तार किया था। वसीम मलिक की पुलिस ने छह दिन बाद गिरफ्तारी दिखा दी थी, लेकिन दूसरे आरोपी का पुलिस सुराग नहीं लगा सकी। अदालत में पीड़िता युवक को पहचानने से इंकार कर चुकी है। वहीं डीएनए सैंपल भी उससे मैच नहीं हुए थे। मामले में मोड़ तब आया जब नवंबर 2017 में कोचिंग से पीजी जा रही मोहाली निवासी युवती के साथ सेक्टर-56 में भी ऐसी ही वारदात हुई। गिरफ्तार मुख्य आरोपी मोहम्मद इरफान के डीएनए को पुलिस ने जांच के लिए भेजा हुआ था। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि आरोपी 12 दिसंबर, 2016 में सेक्टर-29 में हुए गैंगरेप में भी शामिल था। इसके बाद इंडस्ट्रियल एरिया थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी मोहम्मद इरफान को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर उसका रिमांड लिया और उससे पूछताछ के आधार पर दूसरे आरोपी कमल हसन को गिरफ्तार किया।
अदालत में बयान से मुकर चुकी है पीड़िता
12 दिसंबर, 2016 को कॉल सेंटर में काम करने वाली युवती से सेक्टर-29 के जंगली एरिया में सामूहिक दुराचार हुआ। इसके बाद पुलिस ने 15 दिसंबर 216 को सेक्टर-52 निवासी वसीम मलिक को पीड़िता द्वारा बनवाए गए स्कैच के आधार पर गिरफ्तार किया था। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज कर अदालत में चालान पेश किया। वसीम के खिलाफ केस का ट्रायल भी शुरू हो चुका है। वहीं पीड़िता अदालत में वसीम मलिक को पहचानने से इंकार कर चुकी है।
माता-पिता का दर्द हुआ बयां
अदालत से वसीम को जमानत मिलने का पता चलने के बाद सुबह से अदालत के बाहर इंतजार में खड़े उसके माता-पिता के आंसू निकल आए। वसीम मलिक की मां मुस्तरी बेगम ने कहा कि उनका बेटा बिना किसी गलती के 15 दिसंबर से जेल में बंद है। जमानत के लिए उन्होंने दो बार जिला अदालत और एक बार हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। रोते-रोते उन्होंने बताया कि उनके बेटे का कोई कसूर नहीं था। इसके बावजूद वह पिछले 16 महीने से जेल में बंद है। पिता मोहम्मद असगर ने कहा कि केस में उनके बेटे का नाम आने के बाद से पूरे परिवार की इज्जत मिट्टी में मिल गई है। वहीं उनकी बेटी की शादी भी टूट गई। पुलिस के अलावा रिश्तेदारों, आसपास के लोगों ने भी उनके साथ जो व्यवहार किया वे उसका जिक्र भी नहीं कर सकते।
अब आगे क्या
वसीम मलिक के खिलाफ केस अदालत में विचाराधीन है। उसके वकील अंकुर चौधरी के अनुसार केस में आरोप तय हो चुके हैं और उसके खिलाफ ट्रायल भी चल रहा है। अब जबकि दोनों आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं तो पुलिस उसे केस से डिस्चार्ज की अपील नहीं कर सकती है। वहीं एफआईआर भी क्वैश नहीं की जा सकती है। ऐसे में कानूनी तौर पर अब केवल एक ही रास्ता है और वह यह कि वह वसीम के खिलाफ केस वापस ले सकती है। इसके लिए पुलिस को वसीम के खिलाफ केस डिस्चार्ज की याचिका दायर करनी होगी।