बिना डाक्टर, उपकरण हो गया अस्पताल का हो गया उद्घाटन, इलाज कब मिलेगा यह तय नहीं
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सेक्टर-48 में आनन-फानन में 100 बेड के हास्पिटल के शुभारंभ पर उठ रहे सवाल, आखिर क्यों थी इतनी जल्दी
मेडिकल कालेज और पीजीआई के साथ पीपीपी मॉडल पर संचालन का चल रहा विचार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सांसद किरण खेर व प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने सोमवार का सेक्टर-48 में जिस हास्पिटल का उद्घाटन किया, उसकी सिर्फ बिल्डिंग ही बनकर तैयार है। वहां न तो डाक्टर हैं, न उपकरण और न ही फर्नीचर। इसके बावजूद आनन-फानन में अस्पताल का उद्घाटन कर दिया गया। आखिर उद्घाटन की इतनी जल्दी क्यों थी जब इस हास्पिटल में मौजूदा समय में इलाज ही नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों ने बताया है कि हास्पिटल अभी जिस स्थिति में है, उसे चालू होने में कम से कम चार महीने का वक्त लग सकता है। सबसे बड़ी बाधा हास्पिटल को संचालित करने की है। इस हास्पिटल को चलाने के लिए चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग के पास डाक्टर नहीं हैं। डाक्टरों के नए पोस्ट की स्वीकृति भेजी गई है। इसकी अनुमति कब तक मिलेगी, यह कोई नहीं बता सकता। छह महीने भी लग सकते हैं तो दो साल का वक्त भी। जब तक डाक्टरों की नियुक्ति नहीं होती, तब तक इसे चलाने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने पीजीआई और मेडिकल कालेज से संपर्क साधा है। साथ ही पीपीपी मॉडल पर भी इसे चलाने की कोशिश की जा रही है।
मेडिकल कालेज को मिल सकती है जिम्मेदारी
सूत्रों ने दावा किया है कि चंडीगढ़ प्रशासन ने सेक्टर-32 मेडिकल कालेज प्रशासन से इस संबंध में बातचीत की है। उसके बाद मेडिकल कालेज ने इस पर विचार-विमर्श किया और अपना एक प्रपोजल भी बनाकर भेजा है। प्रस्ताव के मुताबिक मेडिकल कालेज अपने चार डिपार्टमेंट सेक्टर-48 में शिफ्ट कर सकता है। इसमें कार्डियोलॉजी, कार्डियोथ्रोसिक सर्जरी, न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी डिपार्टमेंट शामिल हैं। ये चारों डिपार्टमेंट इस समय मेडिकल कालेज में संचालित हो रहे हैं। इनकी अच्छी-खासी ओपीडी भी है। बताया जा रहा है कि मेडिकल कालेज के प्रपोजल पर चंडीगढ़ प्रशासन इसी हफ्ते एक मीटिंग कर निर्णय ले सकता है। यदि स्वीकृति मिलती है तो मेडिकल कालेज की काफी जगह खाली हो जाएगी, इसमें उन डिपार्टमेंट के बेड बढ़ा दिए जाएंगे, जिनमें बेड काफी कम हैं। इससे कालेज एमबीबीएस की 100 से 150 सीटे बढ़ाने का दावा मजबूत हो सकता है।
पीजीआई को बिल्डिंग पसंद आई, कई मुद्दों पर सहमति बाकी
हास्पिटल को चलाने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने पीजीआई से भी संपर्क किया है। पीजीआई की टीम ने इस हासिपटल का दौरा भी किया और उसके बाद पीजीआई के एचओडी की एक मीटिंग हुई, जिसमें अधिकतर लोगों ने सहमति तो जताई लेकिन साथ में कई सवाल भी खड़े किए। चर्चा हुई कि क्या बिल्डिंग कुछ समय के लिए मिलेगी। यदि मिलेगी तो निचले स्टाफ की भर्ती कौन करेगा। पीजीआई के पास डाक्टर तो हैं, लेकिन नर्स, लैब टेक्नीशियन और दूसरे कर्मचारी की कमी है। क्या चंडीगढ़ प्रशासन इन कर्मचारियों की जिम्मेदारी उठाएगा। हास्पिटल में उपकरण, फर्नीचर भी नहीं है, उसे कौन लगवाएगा। ऐसे कई सवाल हैं, जो उस मीटिंग में उठाए गए। इन मुद्दों पर पीजीआई और चंडीगढ़ प्रशासन की बात होनी है। लेकिन यह इतना आसान नहीं है। यदि सब कुछ तय भी हो जाता है फिर भी हास्पिटल को शुरू होने में कम से कम पांच महीने का वक्त लगेगा। पीजीआई सूत्रों का दावा है यदि पीजीआई इस हास्पिटल को लेता है तो वहां पर मदर एंड चाइल्ड सेंटर शुरू करने पर विचार कर सकता है।
...लेकिन मकसद पूरा नहीं हो पाएगा
सेक्टर-48 हास्पिटल पीजीआई चलाए या मेडिकल कालेज। दोनों ही हास्पिटल अपनी सुपरस्पेशलिस्ट सेवाएं चालू करेंगे लेकिन यह हास्पिटल जिस मकसद के लिए बना था, वो पूूरा नहीं हो पाएगा। दरअसल, जब इस हास्पिटल की नींव रखी गई थी कि तो मकसद यह था कि साउथ सेक्टर से आने वाले जनरल मरीजों का इलाज यहां पर किया जाएगा। इससे मेडिकल कालेज और पीजीआई में आने वाले कई मरीजों स्क्रीनिंग होगी और सेक्टर -16 हास्पिटल का बोझ भी कम होगा। शहर के लगभग सभी हास्पिटल बोझ से दबे हैं। अब यदि इस हास्पिटल में सुपरस्पेशलिस्ट सेवाएं शुरू होती हैं तो जनरल मरीजों का बोझ तो कम होगा नहीं। मरीजों की भीड़ जस के तस बनी रहेगी।