युवती के बयानों में अंतर, छेड़छाड़ मामले में दिव्यांग बरी
- पीड़िता के बयान में अंतर आने पर अदालत ने किया बरी
- मौलीजागरां में घर के बाहर खड़ी युवती का जबरन हाथ पकड़ छेड़छाड़ का था आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। जिला अदालत ने 21 वर्षीय युवती से छेड़छाड़ मामले में 25 वर्षीय दिव्यांग को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया। पीड़िता के अदालत में दिए बयान में अंतर सामने आने पर अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित नहीं कर सका। इस आधार पर अदालत ने मौलीजागरां निवासी सोनू कुमार को बरी कर दिया। पुलिस ने सोनू के खिलाफ युवती की शिकायत पर सितंबर 2017 में आईपीसी की धारा 354, 354ए के तहत मामला दर्ज किया था।
पिछले साल 29 सितंबर पुलिस को दी शिकायत में बीए सेकंड ईयर की छात्रा ने कहा था कि वह मौलीजागरां में अपने घर के बाहर खड़ी थी। इसी दौरान आरोपी सोनू वहां आया और जबरन उसका हाथ पकड़ लिया। उससे छेड़छाड़ करने लगा। इस पर युवती ने विरोध किया और शोर मचा दिया। इसके बाद उसने पिता को वहां बुलाया। यह देख आरोपी वहां से भाग गया। इसके बाद उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
वहीं, बचाव पक्ष के वकील दीक्षित अरोड़ा के अनुसार युवती ने अदालत में दिए बयान में कहा था कि घटना के वक्त उसके पिता घर पर थे और उसके शोर मचाने पर वह बाहर आए थे। वहीं, क्रास एग्जामिनेशन के दौरान युवती ने कबूला कि घटना के वक्त उसके पिता दुकान पर थे। उधर, उसके पिता ने भी कबूला था कि घटना के वक्त वह दुकान पर थे।
इसके अलावा ट्रायल के दौरान पीड़िता ने कबूला कि उसने पुलिस कंट्रोल रूम पर कॉल नहीं किया था। साथ ही उसे खुद नहीं पता कि पुलिस को फोन किसने किया था। बचाव पक्ष ने अदालत में यही दलील दी थी कि युवती के पुलिस को दिए बयान और क्रास एग्जामिनेशन के दौरान दिए बयान में अंतर है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और सबूतों के आधार पर सोनू को बरी कर दिया।