पंजाब और हरियाणा से डेपुटेशन पर आए अधिकारियों के बच्चे को एमबीबीएस में एडमिशन का लाभ देने के लिए केवल शहर के स्कूल से 12वीं पास करने वालों को एडमिशन देने का फैसला गलत है। इन अधिकारियों के लिए शहर के बच्चों से नाइंसाफी हाईकोर्ट नहीं होने देगा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एमबीबीएस में स्टेट कोटा को लेकर जारी अपने विस्तृत आदेश में की है।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि वर्ष 1992-93 में जब जीएमसीएच बना था, तब शहर के स्कूल से दसवीं, ग्यारवीं और बाहरवीं करने वाले आवेदकों ही स्टेट कोटे में दाखिला दिया जाता था। बाद में इसे सिर्फ 11वीं और 12वीं कर दिया गया और अब केवल 12वीं। यह डेपुटेशन पर आए अधिकारियों के बच्चों को लाभ देने के लिए किया गया है, जिससे शहर के बच्चों का हित प्रभावित हुआ है।
हाईकोर्ट ने प्रशासन को आदेश दिया है कि स्टेट कोटे के तहत अब शहर के मान्यता प्राप्त स्कूल से 10 वीं, 11वीं और 12वीं पास करने वालों को ही योग्य माना जाए। केवल 12वीं केनियम से शहर के वास्तविक निवासियों से अन्याय हुआ है। लेकिन हाईकोर्ट शहर के निवासियों और उनके बच्चों के साथ यह नाइंसाफी नहीं होने देगा।
स्टेट कोटे के तहत शहर में एक लंबे समय से अपनी शिक्षा ले रहे छात्रों का पहला अधिकार है जिसे छीनने का प्रशासन ने प्रयास किया है क्योंकि प्रशासन के अधिकारी पंजाब और हरियाणा से डेपुटेशन पर आते हैं और उनके बच्चे भी शहर के एकमात्र मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर सकें, इसके लिए नियमों में ढील दी गई।