चंडीगढ़। एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट ने करीब 70 करोड़ का घोटाला पकड़ा है। दस्तावेजों की जांच-पड़ताल के बाद इस घोटाले में इंड स्विफ्ट कंपनी सहित अब तक करीब 30 कंपनियों की संलिप्तता मिली है। चूंकि घोटाले के सभी केस एडवाइजर के ट्रिब्यूनल कोर्ट में पेंडिंग हैं, इसलिए एक्साइज डिपार्टमेंट को वसूली नहीं हो पाने के चलते करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि, सुप्रीमकोर्ट के आदेश से एडवाइजर की ट्रिब्यूनल कोर्ट की सुनवाई पर लगी रोक हट जाने के बाद अब सुनवाई तेजी से होगी।
बीते साल 17 जुलाई को यूटी प्रशासन में वैट ट्रिब्यूनल कोर्ट के दौरान एक्साइज विभाग ने कंपनी मैसर्ज इंड स्विफ्ट का वैट अमाउंट स्क्रूटनी के बाद पांच करोड़, 90 लाख 54 हजार व 342 रुपये बताया, लेकिन कंपनी की तरफ से पहुंचे एडवोकेट ने 31 मार्च 2015 को ही मामले का निपटारा होने की बात कही। उन्होंने बताया कि एक्साइज विभाग ने महज पांच हजार रुपये का टैक्स वसूलकर उनका चालान किया है। करोड़ों रुपये का टैक्स महज पांच हजार रुपये में निपटने पर पूर्व एडवाइजर ने एक्शन लेते हुए विजिलेंस, यूटी को मामले की तह तक जांच के निर्देश दिए थे।
दस्तावेजों की जांच के बाद सामने आया घोटाला
प्रशासन के निर्देश केबाद एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट संदिग्ध फाइलों की जांच शुरू की तो कई कंपनियों के दस्तावजों में गड़बड़ी निकली। एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट के असिस्टेंट कमिश्नर आरके चौधरी ने बताया कि वैट नहीं जमा करने के मामले में अब तक दस्तावेजों की जांच के बाद 70 करोड़ से अधिक के घोटाले का मामला पकड़ा गया है। इस घोटाले में अलग-अलग तीस कंपनियों की संलिप्तता पाई गई है। उन्होंने बताया कि कई मामलों की सुनवाई तो पहले से ट्रिब्यूनल कोर्ट में चल रही है, जबकि 18 नए मामले हैं, जिनकी सुनवाई ट्रिब्यूनल कोर्ट में होनी है।
अब हो जाएगी केसों की सुनवाई
आरके चौधरी ने बताया कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश के बाद प्रशासन की ट्रिब्यूनल कोर्ट में सुनवाई पर रोक लग गई थी। जिसके चलते प्रशासन को राजस्व के रूप में करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा था। फ्रॉड में पकड़ी गई कई कंपनियों की सुनवाई भी नहीं हो पा रही थी। अब सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने केबाद जल्द ही फ्रॉड करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई तय हो सकेगी।