पंजाब विश्वविद्यालय इस बार एनआरआई व विदेशी स्टूडेंट्स को अपने परिसर तक लाने में सफल नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि अब तक महज 74 विद्यार्थियों ने विभिन्न कोर्सेज में एडमिशन के लिए आवेदन किए हैं। इसका कारण माना जा रहा है कि पीयू के पास पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। साथ ही फैकल्टी की कमी और शिक्षा का बेहतर माहौल नहीं है। विदेशी रैंकिंग में पीयू को खास स्थान नहीं मिला। परसेप्शन ज्यादा अच्छा नहीं होना भी इसका कारण बताया जाता रहा है।
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हालांकि, पीयू प्रशासन का दावा है कि दस जुलाई तक एनआरआई व विदेशी स्टूडेंट्स की संख्या में बड़ा इजाफा होगा। आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले साल दो दर्जन से अधिक कोर्सेज में 387 विद्यार्थियों ने एडमिशन लिए थे। इसमें सर्वाधिक विद्यार्थी अफगानिस्तान से पहुंचे थे। इन विद्यार्थियों ने स्कॉलरशिप के जरिए एडमिशन लिए थे। इनके अलावा ईरान, कनाडा, आस्ट्रेलिया, ब्राजील, बांग्लादेश, थाईलैंड व नेपाल आदि देशों से स्टूडेंट्स आए थे।
इस बार भी अफगानिस्तान के विद्यार्थी ऑनलाइन दाखिले में दिखना तो शुरू हो गए हैं, लेकिन अन्य देशों के विद्यार्थी कम दिखाई दिए। दस जुलाई एडमिशन की आखिरी तिथि है। विशेषज्ञ इस तिथि तक लगभग 50 आवेदन और आने की संभावना बता रहे हैं। हालांकि, पीयू पिछले साल जितने विद्यार्थी इस बार भी आने की बात कह रहा है। मालूम हो कि पीयू व रीजनल सेंटर्स में 527 सीटें व कॉलेजों में 220 सीटें एनआरआई विद्यार्थियों के लिए आरक्षित हैं।
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हर जगह किया संपर्क, नतीजा कुछ नहीं निकला
पीयू की ओर से कई सेमिनार कराए गए। आस्ट्रेलिया, सिडनी, यूके, अमेरिका, अफगानिस्तान, थाईलैंड, ईरान आदि देशों से विश्वविद्यालयों के वीसी व अन्य विशेषज्ञ बुलाए गए। उन्होंने यहां के विभागों का दौरा किया। यहां के विशेषज्ञ भी विदेशी विश्वविद्यालयों तक पहुंचे। इस कार्य पर लाखों रुपये खर्च भी हुए, लेकिन इसका लाभ एडमिशन में देखने को नहीं मिल रहा है।
बताया जाता है कि विदेशी छात्रों को लाने के लिए पीयू प्रशासन ने कुछ शिक्षकों को जिम्मा दिया है। हालांकि, वह कोशिश में हैं। यदि इस बार विदेशी स्टूडेंट्स कम पहुंचे तो पीयू का परसेप्शन विदेशी धरती पर और कम होगा और उसका असर क्यूएस, टाइम्स व एनटीयू की रैंकिंग पर भी पड़ेगा।
इन कोर्सेज में होते हैं अधिक एडमिशन
एनआरआई व विदेशी विद्यार्थी बिजनेस, विज्ञान, तकनीकी कोर्सेज में एडमिशन के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा लैंग्वेज कोर्सेज जैसे फ्रेंच, रशियन, चाइनीज, जर्मन में डिप्लोमा व डिग्री के लिए भी अप्लाई करते हैं।
थाईलैंड से मिल सकते हैं हजारों स्टूडेंट
पीयू यदि मुख्य बिंदुओं पर फोकस करे और अपने पाठ्यक्रम में कुछ बदलाव करे तो हजारों छात्र तो उन्हें थाईलैंड से मिल सकते हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि थाईलैंड में थाई भाषा चलती है। अंग्रेजी का प्रयोग कम होता है। ऐसे में उन्हें पीयू रेमेडियल कोर्सेज के जरिये अंग्रेजी सिखाए और उनके दाखिले कर ले। विदेशी मुद्रा पीयू के खाते में चली आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि थाई स्टूडेंट्स के लिए अंग्रेजी की रेमेडियल कक्षाएं छह माह के लिए पाठ्यक्रम में जोड़ दी जाएं और उसके बदले में फीस ली जाए तो वहां के विद्यार्थी यहां आ सकते हैं।
दादी, नानी भी रहीं हैं एनआरआई तो ले सकते हैं एडमिशन
बुधवार को पीयू की ओर से प्रेसवार्ता की गई। इस दौरान डीयूआई प्रो. शंकर जी झा, डीन इंटरनेशनल स्टूडेंट्स प्रो. नंदिता, डीन एलुमिनी रिलेशन प्रो. दीप्ति गुप्ता ने बताया कि एनआरआई सीटों पर वह विद्यार्थी भी एडमिशन ले सकते हैं, जिनके परिवार में दादी, नानी, चाचा, चाची व अन्य कोई एनआरआई हो।
उसके लिए विद्यार्थियों को एक सर्टिफिकेट देना होगा और उनका एडमिशन हो जाएगा। स्टूडेंट्स नियमों की जानकारी वेबसाइट से लें और एडमिशन के लिए अप्लाई करें। पीयू छात्र-छात्राओं को समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। ऑनर्स स्कूल में भी एडमिशन की प्रक्रिया के बारे में डीन साइंसेज प्रो. देविंदर मेहता ने बताया।
कहा कि एनआरआई व विदेशी सीटों पर एडमिशन दस जुलाई तक होंगे। डीयूआई ने बताया कि जरूरत पड़ने पर आखिरी तिथि बढ़ाई जा सकती है। ऑफलाइन आवेदन भी लिए जा सकते हैं। एनआरआई सीटों पर एडमिशन के लिए आवेदन पीयू को मिल रहे हैं। उम्मीद है कि दस जुलाई तक काफी आवेदन मिलेंगे।
उन्होंने फीस की भी जानकारी दी। इस मौके पर प्रो. सुखविंदर, प्रो. बैजनाथ, डीपीआर रेनुका बी सलवान आदि रहीं।