चंडीगढ़। यूटी प्रशासन के पास चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के स्मॉल फ्लैट्स स्कीम के तहत रेंट जमा करवाने को लेकर कोई पॉलिसी नहीं है। यही वजह है कि अलॉटी सीएचबी का करोड़ों रुपये दबाए बैठे हैं। कुछ अलॉटी हर माह रेंट जमा कर रहे हैं। वहीं, सैकड़ों की संख्या में अलॉटी एक साल, दो साल या फिर पांच तक रेंट जमा नहीं करते हैं। सीएचबी की ओर से नोटिस जारी होने के बाद ये लोग रेंट जमा कराते हैं। सूत्रों की मानें तो जो अलॉटी कई साल बाद रेंट जमा करते हैं, उनसे कोई पेनल्टी नहीं ली जाती है। उन्हें हर माह जमा होने वाले रेंट के हिसाब से ही रुपये जमा करना होता है।
यही वजह है कि अलॉटी कई साल बाद रेंट जमा करते हैं। सीएचबी की मानें तो जो अलॉटी हर माह रेंट नहीं जमा करते हैं, उन पर कुछ मामूली ही सही पेनल्टी तो होनी चाहिए। ऐसे में तो जो हर माह रेंट जमा करते हैं और जो अलॉटी पांच साल बाद रेंट जमा करते हैं। अभी दोनों में कोई अंतर नहीं है। सीएचबी एक बड़े अफसर का कहना है कि यदि लेट से जमा करने वाले अलॉटियों पर कुछ पेनल्टी का प्राविधान कर दिया जाए तो रेंट जमा होने में तेजी आ सकती है।
डिफाल्टरों से होनी है 22 करोड़ की रिकवरी
हॉल ही में बोर्ड ने कैंप लगाकर काफी अलॉटियों से रेंट जमा करवाया है। इसके बाद भी बोर्ड को अभी डिफाल्टरों से करीब 22 करोड़ रुपये की रिकवरी करनी है, जिसकी लिस्ट जल्द ही बोर्ड द्वारा जारी कर दी जाएगी। बोर्ड की ओर से इन सभी अलॉटियों को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। अगर इस दौरान इन्होंने अपना पक्ष नहीं रखा तो बोर्ड की ओर से आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस संदर्भ में सीईओ यशपाल गर्ग का कहना है कि प्रशासन की ओर से ऐसे निर्देश नहीं दिए गए हैं कि कई साल से रेंट नहीं जमा करने वाले अलॉटियों से रेंट के साथ कोई पेनल्टी ली जाए, इसलिए हम अपने अलॉटियों से केवल रेंट का पैसा जमा ही जमा करवाते हैं।
बोर्ड के एरिया वाइज अलॉटी
बोर्ड ने हॉल ही में धनास, रामदरबार, मौलीजागरां, सेक्टर-38वेस्ट, सेक्टर-49, सेक्टर-56 और इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में कैंप लगाकर रेंट की वसूली की थी। इसके बाद बोर्ड ने बीते 30 अप्रैल तक के डिफाल्टरों की सूची जारी की थी। बोर्ड की लिस्ट के तहत धनास से 7333, राम दरबार में 534, सेक्टर-49 में 886, सेक्टर-38वेस्ट में 997, मौलीजागरां में 1300, सेक्टर-56 पलसौरा में 542 और इंडस्ट्रियल एरिया में 102 के करीब डिफाल्टर सामने आए थे। इन डिफाल्टरों ने कई साल से रेंट नहीं जमा किया है।