साध्वी से यौन शोषण और पत्रकार छत्रपति हत्याकांड मामले में सजा काट रहे डेरामुखी राम रहीम को पैरोल देने के मामले में स्वराज इंडिया के सदस्यों ने विरोध किया है। उन्होंने विरोध करते हुए कहा कि अगर सरकार ने डेरामुखी को पैरोल दी तो स्वराज इंडिया इसके विरुद्ध कोर्ट जाएगी। हरियाणा के 2012 के कानून के तहत हार्ड कोर कैदी पैरोल का हकदार नहीं है।
राम रहीम को अगस्त 2017 में बलात्कार केस में आजीवन सजा व जनवरी 2019 में हत्या केस में 20 साल सजा हुई है। लगातार दो केसों में सजा होने के आधार पर यह हार्ड कोर कैदी की श्रेणी में आता है। अगस्त 2017 में सजा सुनाए जाने के समय डेरा समर्थकों ने हरियाणा व पंजाब में जिस तरह की हिंसा फैलाई थी, उसे देखते हुए स्पष्ट है कि डेरामुखी को पैरोल मिलने से राज्य में शांति भंग होने व कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए फिर गोलियां चलेंगी व खून बह सकता है।
छत्रपति हत्या केस में तो सजा भुगतते हुए अभी मात्र छह महीने हुए हैं, तो पैरोल की दरखास्त पर विचार ही क्यों हुआ। डेरा मुखी के मालिकाना हक वाली कृषि योग्य भूमि होने व इस अपराधी को बीते सालों में खेती करने का कोई सबूत है ही नहीं। यूं भी जुलाई महीना न तो खेती में फसलों की बुआई या कटाई का है ही नहीं । पत्रकार छत्रपति जिनकी हत्या राम रहीम ने करवाई थी, उनकी बेटी श्रेयसी भी इस विरोध में शामिल हुई।
उन्होंने खेद जताते हुए कहा कि दशकों के संघर्ष के बाद न्याय मिला था। भय के साये में यह लंबा संघर्ष रहा। लेकिन अब बाबा पर राजनीतिक दलों की कृपा देखकर दंग हूं। स्वराज इंडिया हरियाणा के अध्यक्ष राजीव गोदारा ने कहा कि डेरे की वोट लेकर बनी सरकार ने 2017 में डेरामुखी को बचाने व खुश करने के लिए प्रदेश को हिंसा की आग में झोंक दिया था। इसके अलावा पिछले 5 साल में दो अन्य मौकों पर भी भाजपा की सरकार ने वोट पक्के करने की खातिर समाज को बांटने का हिंसक खेल खेला है।