फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूटी इंप्लाइज प्रशासन के खिलाफ खोलेंगे मोर्चा

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। यूटी इंप्लाइज हाउसिंग वेलफेयर सोसाइटी के सदस्यों की मंगलवार को एक आवश्यक मीटिंग हुई। इसमें इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम के तहत सीएचबी की ओर से महंगे दामों पर फ्लैट्स लेने के मामले में अपनी राय नहीं देंगे, इस पर सहमति बनी है। कर्मचारी फ्लैट्स पाने के लिए अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाने केसाथ प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे। बैठक में तय हुआ कि यदि एक माह में प्रशासन ने 2008 के रेट से फ्लैट्स का निस्तारण नहीं किया गया तो कर्मचारी आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।
विज्ञापन

सेक्टर-20 के मस्जिद ग्राउंड परिसर में हुई मीटिंग में सैकड़ों कर्मचारियों ने भाग लिया। यूटी चंडीगढ़ में करीब 22 हजार इंप्लाइज हैं। कर्मचारियों को सस्ते दरों पर फ्लैट्स मुहैया कराने केलिए साल 2008 में स्कीम बनाई गई थी। मीटिंग में कर्मचारियों ने हाउसिंग स्कीम को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। कर्मचारियों का कहना है कि पहले तो प्रशासन ने स्कीम बना दी, सर्वे कराकर इंप्लाइज से पैसे जमा करवा लिए। अब दस साल बाद कर्मचारियों को मिलने वाले फ्लैट्स की कीमत करोड़ों तय कर दी गई।
यूटी गवर्नमेंट इंप्लाइज सीएचबी हाउसिंग वेलफेयर सोसायटी के महासचिव डॉ. धर्मेंद्र ने बताया कि सीएचबी के अफसरों की लापरवाही का खामियाजा कर्मचारियों को उठाना पड़ रहा है। प्रशासन लगातार कर्मचारियों के हितों को अनदेखा करता चला आ रहा है, जिसके चलते यह नौबत आ गई है। मीटिंग में कर्मचारियों ने फैसला लिया है कि हम फ्लैट्स लेने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। इसके लिए वह कोर्ट जाएंगे। इसके साथ ही यूटी के कर्मचारी लाखों कर्मचारी प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे। बैठक में यूनियन के बलविंदर सिंह, रविंद्र कौशल, नरेश कुमार, सुरजीत कुमार सहित सैकड़ों कर्मचारी मौजूद रहे।
विज्ञापन

बताते चलें कि प्रशासन की ओर से साल 2008 में चंडीगढ़ के कर्मचारियों के लिए सस्ते फ़्लैट्स देने केलिए इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम बनाई थी। सर्वे के बाद मकान की कीमत के मुताबिक टोकन मनी भी जमा करा ली गई थी। इसके बाद स्कीम अधर में लटक गई। अब दोबारा स्कीम परवान चढ़ी तो फ्लैट्स केरेट इतने ज्यादा हो चुके हैं कि कर्मचारियों के लिए अब ये फ्लैट्स ले पाना संभव नहीं है। इसे लेकर अब कर्मचारी आरपार की लड़ाई पर विचार कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें