चंडीगढ़। एक बार फिर बारिश के मौसम में शहरवासियों को बिजली के झटके लगने वाले हैं। मानसून के पहले ही हल्की बारिश और तेज हवाओं ने बिजली विभाग के 24 घंटे आपूर्ति देने के दावों की पोल खोल दी है। प्रशासन के इलेक्ट्रिक डिपार्टमेंट की ओर से लोगों को बेहतर आपूर्ति देने के लिए तीन साल पहले तारों को अंडर ग्राउंड करने की कवायद शुरू हुई थी, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते अभी तक यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी है। बताते चलें कि शहर में 2.17 लाख बिजली के कंज्यूमर हैं।
दरअसल, शहर भर में बिजली विभाग के जर्जर तार मुसीबत का सबब बने हुए हैं। हल्की आंधी में यह तार टूट जा रहे हैं। तारों की हालत बहुत ही खराब है। वहीं, कहीं-कहीं इन तारों का जाल लटक रहा है। इन तारों से बड़े हादसों के होने का खतरा मंडराता रहता है। जर्जर तार टूटने से रोजाना अक्सर बिजली कटौती हो जाती है। यही वजह है कि दिन भर लोगों को बिजली ट्रिपिंग की समस्या से जूझना पड़ता है।
सेक्टर 8 से होनी है प्रोजेक्ट की शुरुआत
जेईआरसी ने इस प्रोजेक्ट के लिए 17.89 करोड़ रुपये अप्रूव किए हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तहत सेक्टर 8 से इसकी शुरुआत होनी है, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते अभी तक केबल को अंडर ग्राउंड करने की पहल शुरू नहीं हो पाई है। बताया जाता है कि पूरे प्रोजेक्ट में 70 प्रतिशत हिस्सेदारी प्रशासन की होगी, जबकि 30 प्रतिशत स्मार्ट पॉवर ग्रिड की हिस्सेदारी बताई जा रही है।
रात में आती है अधिक समस्या
हालात तब ज्यादा खराब हो जाते हैं, जब रात के वक्त तार टूटने पर कोई भी कर्मचारी जल्दी जोड़ने के लिए नहीं आते हैं। इससे घंटों बिना बिजली के लोग परेशानी में फंसे रहते हैं। अक्सर रात में गई बिजली सुबह ही आती है।
जल्द मिलेगी निजात
इस संदर्भ में यूटी इलेक्ट्रिक डिपार्टमेंट के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर राजेंद्र सिंह का कहना है कि गर्मी में बिजली की खपत बढ़ जाती है। इसके अलावा तेज हवाएं चलने से तार ज्यादा टूट रहे हैं। इन जर्जर तारों से ही सैकड़ों घरों में बिजली आपूर्ति की जाती है। जल्द ही इस समस्या से लोगों को निजात मिल जाएगी।