पंजाब यूनिवर्सिटी इस बार नैक के मानकों पर खरा उतरने के लिए पूरी तरह से कमर कस चुका है। पीयू को 2022 तक का टारगेट दिया गया है, लेकिन उसकी मेहनत का ही नतीजा है कि 80 फीसदी कार्यों में खरा उतर चुका है। हर बिंदु पर पीयू ने बेहतर ढंग से कार्य किया है। बोर्ड व चॉक प्रणाली कक्षाओं में पढ़ाने के लिए बनी है, लेकिन पूरे कैंपस को पीयू ने वाई फाई फ्री कर दिया है।
हर जगह नेटवर्क है, जिसके जरिये विद्यार्थी खुद ही नेट पर पढ़ाई कर रहे हैं। कई अन्य बिंदुओं पर लगाई गई आपत्तियां भी सही करने में पीयू कामयाब रहा। कुछ बिंदु बचे हैं जिन पर आईक्यूएसी जल्द ही मानक पूरे कर लेगा। मार्च 2015 में नैक की टीम पीयू पहुंची थी। उन्होंने पाया था कि यहां विद्यार्थियों के लिए छात्रावासों की संख्या पर्याप्त न होने, संकाय की कमी, बोर्ड-चॉक विधि का शिक्षण के लिए चलन, सीबीसीएस विधि चलने, अपर्याप्त तकनीकी स्टाफ, कम प्लेसमेंट समेत कई बिंदुओं पर काम पूरा नहीं था।
कई कमियां सामने आने के बाद नैक ने इनकी पूर्ति के लिए पीयू को वर्ष 2022 तक का समय दिया था। इन तीन वर्षों में पीयू ने बेहतर कार्य कर अधिकांश मानकों की पूर्ति की है। बाकी कार्य इसी साल में पूरे करने की बात की जा रही है। मालूम हो कि नैक की टीम की रिपोर्ट के बाद ग्रेडिंग जारी की जाती है।
यहां पूरा हुआ काम
- मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभागों द्वारा अनुसंधान के लिए संसाधन जुटाए गए।
- कंसल्टेंसी के माध्यम से आय जुटाने के प्रयास किए।
- छात्रों की भागीदारी को ट्रैक करने के लिए संरचित तंत्र के लिए पोर्टल की व्यवस्था।
- सामान व फाइलों के रखरखाव की स्थिति में सुधार हुआ।
- स्वच्छता के लिए गीला व सूखा कूड़ा अलग किया जा रहा है।
- सूचना संसाधन पोर्टल के जरिये छात्रों की प्रगति पर ध्यान दिया जा रहा है।
- छात्रों का वैधानिक, शैक्षणिक और औपचारिक प्रतिनिधित्व बना हुआ है।
- आईक्यूएसी को प्रभावी बनाया गया है जो हर मामले को सुलझाने के प्रयास कर रही है।
- परामर्श केमाध्यम से गरीब राजस्व सृजन का कार्य हो रहा है।
- छात्रावासों की संख्या दस से बढ़कर 11 हो रही है। इसकेअलावा हॉस्टलों का उच्चीकरण हो रहा है।
- प्लेसमेंट व्यवस्था में बड़ा सुधार हुआ। हजारों विद्यार्थियों को हर साल नौकरी दिलाई जा रही है।
इन बिंदुओं पर चल रहा है काम
- मूल्य आधारित शिक्षा सभी कार्यक्रमों में एकीकृत किए जाने की तैयारी है।
- सीबीसीएस सिस्टम तैयार हो गया है, उसे लागू किया जाएगा।
- छात्रों के फीडबैक सभी विभागों से अब आने लगे हैं। कुछ सुधार की जरूरत है।
- अग्रिम शिक्षार्थियों की पहचान के लिए तंत्र विकसित किया जाना था, इस पर अभी काम चल रहा है।
- संकायों में स्टाफ की कमी है। इसकी अनुमति शासन से नहीं मिली।
बाकी मानकों पर जल्द पूरा होगा काम
नैक की ओर से जो सुझाव दिए गए थे उन पर तेजी से काम चल रहा है। कई मानक पूरे हो गए हैं। बाकी मानकों पर काम भी जल्द ही पूरा हो जाएगा।
- डॉ. आशीष जैन, निदेशक, आईक्यूएसी पीयू