डाक्टरों के साथ हो रही हिंसक घटनाओं को ध्यान में रखते हुए पीजीआई ने एक कमेटी गठित की है। इसका मकसद उन सुझावों पर काम करना है, जिससे ऐसी घटनाओं को कम किया जा सके और डाक्टरों को एक सुरक्षित माहौल दिया जा सके। कमेटी की ओर से जो भी सुझाव आएंगे, उन्हें सख्ती से लागू किया जाएगा। पीजीआई ने सोमवार को ही इस मामले में कमेटी गठित कर दी थी। इस दिन पूरे देश के डाक्टर हड़ताल पर थे। कमेटी में रेजिडेंट, फैकल्टी, कर्मचारी और नर्सिंग यूनियन के सदस्य शामिल रहेंगे।
पीजीआई डायरेक्टर प्रोफेसर जगतराम ने कहा कि कमेटी की भूमिका उन तरीकों को पता लगाने की होगी कि अस्पताल के अंदर हिंसक घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है या कम किया जा सकता। कुछ डाक्टरों ने इमरजेंसी में अटेंडेंट की संख्या सीमित करने का सुझाव दिया था। डाक्टरों का कहना है कि मरीज के साथ सिर्फ एक अटेंडेंट होना चाहिए। इस पर डायरेक्टर का कहना है कि आदर्श रूप से सिर्फ एक अटेंडेंट की अनुमति होनी चाहिए, लेकिन इमरजेंसी में एक से ज्यादा अटेंडेंट की जरूरत पड़ती है लेकिन संख्या दो से अधिक नहीं होनी चाहिए।
पिछली घटनाओं से सबक लेते हुए पीजीआई ने कुछ समय पहले इमरजेंसी के अंदर एक क्विक रिएक्शन टीम का गठन किया था। इसमें अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड्स की भर्ती की गई थी। इमरजेंसी में एक अलार्म भी लगा है। जैसे ही कोई घटना हुई तो डाक्टरों के अलार्म बजाते ही सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंच जाते हैं। रेजिडेंट डाक्टरों का कहना है कि इससे फायदा तो हुआ है, लेकिन ये गार्ड भी आम गार्ड की तरह हैं। रेजिडेंट डाक्टरों की मांग है कि यहां पर बाउंसर हों या फिर सशस्त्र गार्ड। तभी स्थिति पर काबू किया जा सकता है। इमरजेंसी व ट्रामा सेंटर के अंदर अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए और दो से अधिक अटेंडेंट को अनुमति न दी जाए।
मंगलवार को सुचारु रूप से चली ओपीडी
पश्चिम बंगाल में डाक्टरों की हड़ताल खत्म होने पर मंगलवार को पीजीआई सहित सभी अस्पतालों की ओपीडी सामान्य रूप से चली। पीजीआई में मंगलवार को आठ हजार से ज्यादा मरीजों की ओपीडी हुई जबकि सोमवार को सिर्फ चार हजार मरीजों की हुई थी। इसी तरह से सेक्टर 16 और मेडिकल कालेज में ओपीडी की भीड़ उमड़ पड़ी। दरअसल सोमवार को हड़ताल की वजह से काफी मरीज बिना इलाज के लौट गए थे। इसलिए मंगलवार को अस्पतालों में मरीजों की भीड़ अच्छी खासी देखी गई।