चंडीगढ़। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट द्वारा सेक्टर-43 में जमीन देने से इनकार करने के बाद अब यूटी प्रशासन सेक्टर-34 में 50 एकड़ जमीन पर कामर्शियल हब बनाने की योजना तैयार कर रहा है। इस माह के अंत में स्मार्ट सिटी लिमिटेड बोर्ड आफ डायरेक्टर्स की बैठक में इस प्रस्ताव पर मोहर लग सकती है। बताते चलें कि प्रशासन की ओर से सेक्टर-43 को विकसित करने की योजना बनाई थी, लेकिन वन विभाग ने यह जमीन प्रशासन को नहीं मुहैया कराने के चलते अब प्रशासन को अपना प्लान बदलना पड़ रहा है।
प्रशासन ने लगभग 19 साल पहले सेक्टर-43 में 71 एकड़ जमीन वन विभाग को इस लिए दी थी कि इस जमीन पर अवैध कब्जा न हो सके। जमीन प्रशासन की है और इसे वन विभाग को अभी तक ट्रांसफर नहीं किया गया। अवैध कब्जे रोकने के लिए वन विभाग ने सिर्फ पौधे लगाए। पौधे बड़े हो गए और अब यह एरिया वन विभाग द्वारा भेजे जाने वाले मिनिस्ट्री के रिकार्ड में आ गया। चंडीगढ़ का वन एरिया भी इस जमीन की वजह से बढ़ा है। अब वन विभाग इस जमीन को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। प्रशासन भी स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट के लिए पेड़ों को कटवाने से घबरा रहा है, इसलिए वन विभाग ने जमीन ही स्मार्ट सिटी को ट्रांसफर करने से मना कर दिया गया। इस लिए अब प्रशासन सेक्टर-34 को विकसित करने पर विचार कर रहा है।
अब प्रशासन नए सिरे से बन रही योजना
साल 2016 में चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी के शहरों में शामिल किया गया था। स्मार्ट सिटी योजना के तहत शहर को विकसित करने के लिए 6,200 करोड़ की योजना तैयार की गई थी। इसमें 4,933 करोड़ के प्रोजेक्ट पीपीपी मोड पर तैयार किए जाने थे। स्मार्ट सिटी कंपनी ने एरिया की डेवलपमेंट पर ही 40 करोड़ खर्च करने थे। लेकिन जमीन फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के पास होने के चलते सेक्टर-43 में प्रस्तावित निर्माण प्रोजेक्टों पर काम शुरू नहीं हो सका है। अब प्रशासन नए सिरे से योजना बना रहा है।
ऐसे विकसित होगा सेक्टर-34
जानकारी के मुताबिक, स्मार्ट सिटी लिमिटेड की ओर से सेक्टर-34 में 4,933 करोड़ से एग्जीबिशन सेंटर, कन्वेंशन सेंटर, आर्ट गैलरी, एंटरटेनमेंट सेंटर, होटल, ऑफिस स्पेस, हॉस्टल फैसिलिटीज, आइकोनिक एरिया, अफोर्डेबल हाउसेस बनाए जाने का प्रस्ताव था। माह के अंत में स्मार्ट सिटी की होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है।