चंडीगढ़। एक ओर ढोल की थाप और उस पर रोमांच और ऊर्जा से भरपूर भंगड़ा करते पंजाब, हरियाणा, मुंबई, दिल्ली के भंगड़ा ग्रुप। यह था पंजाब यूनिवर्सिटी में आयोजित कंपीटीशन ‘भंगड़ा गढ़’ का सीन। इसका आयोजन रविवार को भंगड़ा बिग्रेड एलएलपी द्वारा किया गया। बारह टीमों के बीच हुआ यह कंपीटीशन कई रोमांचक दौर से होकर गुजरा। इसमें भंगड़े की एक्सपर्ट बारह टीमों ने वो धमाल मचाया कि सभी देखते ही रह गए। इस मौके पर सीनियर डिपुटी मेयर और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष हरदीप सिंह मौजूद रहे।
पीयू के लॉ आडिटोरियम में आयोजित इस कंपीटीशन की शुरुआत सुबह 11 बजे और इसका समापन शाम पांच बजे हुआ। इस कंपीटीशन में कुल बारह टीमों ने हिस्सा लिया। इस कंपीटीशन में दो ग्रुप बनाए गए थे। इसमें से एक था म्यूजिक और दूसरा था लाइव। म्यूजिक कैटेगरी में एनआईटी कुरुक्षेत्र ने पहला इनाम हासिल किया जबकि नचदे रौनकी गबरू ने दूसरा स्थान हासिल किया वहीं तीसरे स्थान पर पंजाबी बाई नेचर की टीम रही। म्यूजिक कैटेगरी में ही बेस्ट डांसर मेल अंकुश जबकि बेस्ट डांसर फीमेल आसीस रहीं। लाइव कैटेगरी में बेस्ट डांसर सफी अली और बेस्ट सिंगर गुरप्रीत सिंह रहे। लाइव कैटेगरी में पिंड बहादुरपुर से आए संत बाबा अदर सिंह जी क्लब की टीम ने पहला स्थान और खालसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल रोपड़ की टीम ने दूसरा स्थान हासिल किया।
इस कार्यक्रम का आगाज पंजाब की मार्शल आर्ट फार्म गतका से किया, जिसमें बाबा बंदा सिंह बहादुर इंटरनेशनल गतका अकादमी द्वारा शानदार पेशकश की गई। इस कार्यक्रम को वीजे रंधावा ने होस्ट किया। एक आयोजक के अनुसार इस कंपीटीशन से जो आय हुई है वह गुरुद्वारा सिंह सभा फेज-1 मोहाली को दी जाएगी। इस कंपीटीशन में म्यूजिक कैटेगरी के विजेता को 51 हजार रुपये का इनाम प्रदान किया गया जबकि फर्स्ट रनरअप को 31 हजार रुपये और सेकेंड रनरअप को 15 हजार रुपये का इनाम प्रदान किया गया। लाइव कैटेगरी के विजेता को 21 हजार रुपये का इनाम प्रदान किया गया। रनरअप को 11 हजार रुपये का नकद इनाम प्रदान किया गया।
..जरा सरकार हम पर भी मेहरबानी करे
चंडीगढ़। जरा हमारे ऊपर भी ध्यान दीजिए, हम तो पंजाब की लोक कला को प्रमोट करने के लिए तमाम प्रयास कर रहे हैं, पर सरकार है कि हमारे इस प्रयास के लिए कुछ नहीं कर रही। यह कहना है इंटरनेशनल भंगड़ा आर्टिस्ट सफी मोहम्मद का। सफी मोहम्मद पीयू में आयोजित भंगड़ा कंपीटीशन में प्रतिभागिता के लिए आए थे। उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्म पर परफार्म करके पदक बटोरे हैं, पर सरकार से न तो कोई प्रोत्साहन मिला न ही इसका कोई माइलेज मिलता है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस दिशा में कदम उठाना चाहिए।
सफी मोहम्मद की टीम के सदस्य मंदीप ने कहा कि टीम गोल्ड मेडल लाती है तो कॉलेज स्तर पर सम्मान मिलता है लेकिन यदि टीम के सदस्यों को इन मेडल्स का लाभ करियर में मिले तो अच्छा होगा। तेजिंदर ने कहा कि पंजाब के भंगड़े में अब कई चेंज आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह से यदि भंगड़े तो बदला जाता रहा तो एक दिन फार्म बिगड़ जाएगी। पंजाबी बाई नेचर भंगड़ा ग्रुप के पलविंदर ने कहा कि अब भंगड़े में वेस्टर्न फार्म आने लगा है। इससे भंगड़ा काफी कुछ बदल गया है। उन्होंने कहा कि भंगड़ा एक लोकनृत्य है और उसके फार्म को बदलना नहीं चाहिए। नच्चदे रौनकी गबरू ग्रुप के हरसिमरत सिंह ने कहा कि वास्तव में भंगड़ा काफी मेहनत और तकनीक से निखरता है। इसके फार्म में चेंज नहीं होना चाहिए।
स्टूडेंट्स को ट्रेनिंग देती हैं असीम चड्ढा
नच्चन शाह की असीस चड्ढा ने बताया कि भंगड़े से उनको बचपन से प्यार था। अब तो वह नई दिल्ली में अपने ग्रुप को चलाती हैं। ग्रुप के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट्स को भंगड़े की ट्रेनिंग देती हैं। उन्होंने कहा कि वास्तव में ढोल की थाप पर होने वाला भंगड़ा तो है ही साथ ही अब म्यूजिक पर भी खूब भंगड़ा होने लगा है। उन्होंने कहा कि वास्तव में भंगड़े का मूल स्वरूप बदलना नहीं चाहिए।