चंडीगढ़। शराब तस्करी रोकने के लिए यूटी प्रशासन मोहाली और पंचकूला के साथ मिलकर एक अंतरराज्यीय त्रिकोणीय ढांचा तैयार कर रहा है। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के निर्देश पर एडवाइजर मनोज परिदा को जिम्मेदारी सौंपी गई है। कमेटी कैसे काम करेगी, इसे लेकर कई दौर की मीटिंग भी हो चुकी है। अगले 100 दिनों में योजना तैयार कर लेंगे, जिससे शराब माफिया का बचकर निकल पाना आसान नहीं होगा।
यूटी प्रशासन की ओर से अगले तीन महीने का एजेंडा तय कर लिया गया है। इसमें चंडीगढ़ से शराब तस्करी भी शामिल है। चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा की तुलना में शराब काफी सस्ती है। यही वजह है कि ज्यादातर लोग मोहाली से होते हुए पंजाब के विभिन्न हिस्सों तक शराब को पहुंचाते हैं। इससे जहां शराब माफिया मालामाल हो रहे हैं, वहीं दूसरे राज्यों को काफी नुकसान सहना पड़ रहा है। यही वजह है कि अब यूटी प्रशासन की ओर से माफियाओं पर नकेल कसने के लिए कदम उठाया जा रहा है। इसमें मोहाली और पंचकूला के उच्चाधिकारी भी शामिल हैं।
प्रशासक के निर्देश पर बनी कमेटी
बीते साल से प्रशासक और पंजाब के गर्वनर वीपी सिंह बदनौर के निर्देश पर शराब की अवैध तस्करी को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने की बात कही जा रही थी। इसे लेकर प्रशासक की ओर से कई बार पंचकूला और मोहाली के उच्चाधिकारियों के साथ मीटिंग भी हो चुकी है। यूटी के कमेटी प्रमुख एडवाइजर मनोज परिदा हैं, जबकि मोहाली और पंचकूला के डीजीपी समेत कई बड़े अफसरों को जिम्मेदारी दी गई है।
केस- एक
चंडीगढ़ से मोहाली के रास्ते एक जा रही एक स्कार्पियो को पुलिस ने बीते 25 मई को पकड़ा था। इसमें शराब की 40 पेटियां लदी हुई थीं। जांच पड़ताल में पता चला कि यह शराब अवैध रूप से चंडीगढ़ से लुधियाना ले जाई जा रही थी।
केस- दो
हरियाणा के खटीका में पुलिस ने चंडीगढ़ मार्का शराब की 68 बोतलों को बीते 26 मई को एक वाहन से बरामद किया था। पुलिस की जांच पड़ताल में पता चला था कि यह शराब चंडीगढ़ से लाई जा रही रही थी। मामले में पुलिस ने आरोपी को जेल भेज दिया था।