पंचकूला। जिले के सरकारी स्कूलों में फायर सेफ्टी सिस्टम नहीं है। अभी तक फायर विभाग की ओर से स्कूलों को नोटिस नहीं भेजा गया है। इस तरह के हालात में कभी भी बड़ा हादसा शहर के सरकारी स्कूलों में होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। स्कूलों में फायर सेफ्टी सिस्टम नहीं लगने का मुख्य कारण बजट की अप्रूवल नहीं मिलना है। अग्निशमन विभाग की ओर से जहां प्राइवेट स्कूलों की चेकिंग और नोटिस दिया जा चुका है। सरकारी स्कूलों में कुछ भी नहीं किया गया है।
गुजरात की कोचिंग सेंटर में आग लगने के बाद शहर के सभी शिक्षण संस्थानों में फायर सेफ्टी सिस्टम होना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए सभी स्कूलों, शिक्षण संस्थानों में चेकिंग की जा रही है। लेकिन शहर के सरकारी स्कूलों में फायर सेफ्टी उपकरण खरीद के लिए कोई बजट नहीं बनाया गया है। इस तरह की हालात में अगर आग लगने की घटना हो जाए तो स्टूडेंट्स की जान खतरे में पड़ सकती है। अभी स्कूलों में अवकाश होने के बाद भी शिक्षा विभाग इस ओर कोई कदम नहीं उठा रहा है। जिले के करीब 90 स्कूलों में यह हालात बने हुए हैं।
पंचकूला फायर विभाग के अधिकारी एसएस मलिक ने बताया कि शिक्षण संस्थानों की जांच की जा रही है। स्कूल खुलने के बाद जुलाई में सरकारी स्कूलों में नोटिस भेजा जाएगा। इस बारे में जिला शिक्षा अधिकारी एचएस सैनी ने बताया कि फायर सेफ्टी की जांच अग्निशमन विभाग की ओर से की जा रही है। जल्द ही मीटिंग कर फायर सेफ्टी उपकरणों को खरीदने का प्रपोजल बनाया जाएगा।
आठ कोचिंग सेंटरों को भेजा दोबारा नोटिस
पंचकूला फायर विभाग की ओर से आठ कोचिंग सेंटरों को दोबारा नोटिस भेजा गया है। इसमें कोचिंग संस्थानों की ओर से कोई एग्जिट प्वाइंट नहीं बनाया गया है। पंचकूला फायर विभाग के अधिकारी एसएस मलिक ने बताया कि डीएसएस कोचिंग सेेंटर सेक्टर -21, 13, 22, लेक फारेस्ट में फायर सेफ्टी नियम पूरा नहीं कर रहे हैं। अगर यह कोचिंग सेंटर एग्जिट प्वाइंट नहीं बनाएंगे तो इनको बंद कराने का नोटिस दिया जाएगा। इन पर सख्त कार्रवाई करते हुए इन्हें बंद कराया जाएगा।