चंडीगढ़। शहर के सभी सेक्टरों में बैंकों के कई एटीएम बूथ हैं। एटीएम बूथ में किसी आपात स्थिति में निपटने की सुविधाएं मौजूद नहीं हैं। एटीएम बूथ में घटी एक घटना के बाद सेक्टर-44 में रहने वाले बालिश आहूजा ने एडवोकेट पंकज चांदगोठिया के माध्यम से एक शिकायत की है, जिसमें मांग की गई है कि बैंकों केएटीएम बूथ के अंदर फर्स्ट एड बॉक्स और सिक्योरिटी गार्ड सहित सभी सुरक्षा उपायों को अपनाने के निर्देश दिए जाएं। उन्होंने बैंक से 2 लाख रुपये मुआवजे की भी मांग की है। शिकायत पर सुनवाई करते हुए कंज्यूमर कोर्ट ने एचडीएफसी और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया है।
शीशा टूटने से लगी 6 साल के बच्चे को चोट
कंज्यूमर कोर्ट में शिकायतकर्ता बालिश आहूजा ने बताया है कि 27 जनवरी 2019 को सुबह 9.45 बजे वह अपने छह साल के बेटे के साथ एचडीएफसी बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए सेक्टर-44डी के बूथ नंबर-317 पर स्थित एसबीआई एटीएम में गए। जैसे ही लेन-देन पूरा हुआ और वह एटीएम से बाहर निकलने के लिए मुड़े, एटीएम बूथ में दोनों एटीएम के बीच लगा शीशा टूट गया, जिससे उनके साथ खड़े 6 साल के बेटे को चोट लग गई। शीशे की वजह से बेटे के पैर में कट लग गया और सीने और जांघ पर भी चोट आई। एटीएम बूथ पर कोई अटेंडेंट नहीं था और न ही कोई सुरक्षा गार्ड मौजूद था। बूथ के अंदर कोई प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स उपलब्ध नहीं था, जो कि किसी भी सार्वजनिक परिसर में अनिवार्य है। उस एटीएम बूथ का सेफ्टी ऑडिट भी नहीं हुआ था। शिकायतकर्ता ने बताया कि एटीएम बूथ में कोई इमरजेंसी नंबर और नाम नहीं था न ही अलार्म बटन की सुविधा मौजूद थी। घटना के बाद शिकायतकर्ता ने कई लिखित शिकायतें कीं और बाद में बैंक ने अपनी गलती मानी और बच्चे के इलाज का खर्चा उठाने का वादा किया, लेकिन उससे भी वह मुकर गए। एसबीआई बैंक ने एटीएम प्रबंधन के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं की। इन सभी को देखते हुए व्यक्ति ने कंज्यूमर कोर्ट में केस किया। 29 अगस्त को दोनों बैंकों को अपना जवाब कोर्ट में सौंपना होगा।