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काव्य गोष्ठी में कवियों ने कविताओं से जमाया रंग

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चंडीगढ़। मेरे लफ्ज कभी खोजते हैं देश में सुभाष जैसे नेता को... कविता जैसे ही परमजीत सिंह सूफी ने प्रस्तुति की सभी ने उनका तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया। मौका था वीरवार को सृजन एन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिवटी की ओर से सेक्टर- 40ए में आयोजित काव्य गोष्ठी का। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में गांधीवादी विचारक केके शारदा और अध्यक्ष के रूप में वरिष्ठ कवि प्रेम विज उपस्थित थे। कार्यक्रमका शुभारंभ में सृजन के अध्यक्ष सोमेश ने कहा कि संस्था 2003 से कविता, नाटक, संगीत और चित्रकला में महतवपूर्ण योगदान देती आ रही है। काव्य गोष्ठी में सोमेश, परमजीत सिंह सूफी, प्रज्ञा शारदा, लाल कृष्ण गुप्ता, उर्मिल सखी, नेहा शर्मा, संतोष गर्ग, विनोद खन्ना, बबिता कपूर, विमला गुगलानी ने कविताएं और गजल पेश कर खूब वाहवाही लूटी। कार्यक्रम का संचालन अमरज्योति ने किया।
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काव्य गोष्ठी का शुभारंभ परमजीत सिंह सूफी ने कविता ‘मेरे लफ्ज कभी खोजते हैं देश में सुभाष जैसे नेता को.. से की। प्रसिद्ध शायर अशोक नादिर ने गजल पेश करते हुए कहा- वतन से मोहब्बत और गरीबी से दुश्मनी नादिर, इन नकाबों से असल चेहरे निकाल ही लेंगे.. खूब वाहवाही लूटी। प्रज्ञा शारदा ने साये की तरह जो सत्य रहा, मेरे जागने पर रातों को जागा, वह मेरा पिता था..’ पेश कर खूब तालियां बटोरीं। इसके बाद लाल कृष्ण गुप्ता सागर ने अकेला चला, अकेला ही रोया और सोया.. अकेलापन कविता प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी। सोमेश ने अपनी गजल निगाहाें में खुमार हुआ महसूस होता है, तसवूरे जाम छलकाता हुआ महसूस होता है.. पेश किया। प्रेम विज ने ‘मैं सिद्धार्थ नहीं’ प्रस्तुत की। इसके अलावा अन्य कवियों ने भी अपनी रचनाएं पेश कर माहौल में रोमांचकता भर दी।
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