चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के हॉस्टल्स में वार्डन तैनाती को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। यही कारण रहा कि साक्षात्कार बोर्ड की ओर से नामों की संस्तुति करने के बाद भी वीसी प्रो. राजकुमार ने उन नामों पर मुहर नहीं लगाई है। जानकारों का कहना है कि जिन नामों पर संस्तुति की गई है वह पूरी तरह निष्पक्ष नहीं हैं, इसलिए वीसी अब पीयू कैलेंडर के मुताबिक अपने विवेक से नामों की घोषणा करेंगे।
ब्वॉयज हॉस्टल नंबर सात से डॉ. दिनेश कुमार व हॉस्टल नंबर आठ के वार्डन डॉ. नरेश कुमार का कार्यकाल पूरा हो गया है। इन हॉस्टलों में वार्डन के लिए आवेदन मांगे गए थे। इसी तरह महिला छात्रावासों में भी वार्डन बनाने हैं। वहां से भी आवेदन आमंत्रित किए गए। दो सीटों के लिए 17 शिक्षकों ने आवेदन किए। वहीं महिला छात्रावासों के लिए पांच शिक्षिकाओं ने। आवेदन आने के बाद इनके साक्षात्कार एक कमेटी की ओर से लिए गए। वहां से नामों की संस्तुति करके वीसी के पास भेज दिए गए। सूत्रों का कहना है कि वीसी ने नामों को देखा लेकिन उनको फाइनल नहीं किया। बताते हैं कि जिन नामों की संस्तुति की गई वह निष्पक्ष नहीं थे। ऐसा प्रतीत हुआ कि पीयू के एक राजनीतिक गुट ने उन नामों का चयन किया हो। सूत्रों का कहना है कि अब दूसरे नामों पर मुहर लग सकती है। सोमवार को इस पर निर्णय लिया जा सकता है।
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छात्रों को हुई दिक्कत तो कौन होगा जिम्मेदार
वार्डन का पद महत्वपूर्ण होता है, लेकिन कार्यकाल पूरा होने के बाद भी छात्रावासों में वार्डन की तैनाती अभी तक नहीं की गई है। जानकारों का कहना है कि यदि हॉस्टल में कोई अप्रिय घटना होगी या छात्रों को कोई दिक्कत होगी तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? वार्डन की तैनाती में देरी नहीं की जानी चाहिए।
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दो पदों का है चार्ज तो हो सकता है बदलाव
वार्डन रहते हुए यदि विभाग अध्यक्ष का चार्ज भी किसी शिक्षक के पास है तो उसमें बदलाव किया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि वीसी इस पर भी विचार कर रहे हैं। इस पर भी सोमवार को ही फैसला होगा।