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पंचकूला की महिलाओं ने दी अपनी सपनों को अलग पहचान

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस स्पेशल पेज के लिए....

पंचकूला की महिलाओं ने दी अपने सपनों को अलग पहचान

- सफलता की राह में आई चुनौतियों का किया डटकर सामना

रीतिका पठानियां
पंचकूला। नारी का जीवन संघर्ष भरा होता है और यह संघर्ष बचपन से ही शुरू हो जाता है। भले ही समाज नारी को लेकर सोच में बदलाव आने का दावा करे। लेकिन हकीकत में स्थिति आज भी पहले जैसे बरकरार हैं। नारी को आज भी जीवन में अपनी पहचान बनाने के लिए लड़ाई करनी पड़ती हैं। उनकी यह लड़ाई कभी बेटी के रूप में परिजनों से होती है तो कभी मां और पत्नी के रूप में पति, ससुराल, बच्चें और समाजवासियों से। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य पर पंचकूला की ऐसी ही महिलाओं से अवगत करवाने जा रहे हैं। जिन्होंने अपनी अलग पहचान बनाने के लिए हर मुश्किल का सामना किया और समाज की अन्य महिलाओं में भी कुछ अलग कर दिखाने की इच्छा उजागर की।

दूसरों के आगे हाथ फैलाने की बजाए मेहनत करना की पसंद
मानकटबरा निवासी कृष्णा पिछले 3 सालों से पंचकूला के अलग-अलग गांवों में अल सुबह अखबार बांटने का काम करती हैं। कृष्णा ने बताया कि पहले वह स्कूल में आया का काम करती थीं और हमेशा से ही मेहनत करके कुछ अलग कर दिखाने की इच्छा रखती आई हैं। इसलिए 2016 में उन्होंने अपने पति के कहने पर पति उनके साथ न्यूज एजेंसी के लिए काम करना शुरू किया। कृष्णा मात्र एक ऐसी महिला हैं जो अल सुबह ऐेसे इलाकों में पैदल जाकर अखबार बांटती हैं जहां न तो सड़कें बनी हैं और न ही व्हीकल के आने-जाने की कोई सुविधा हैं। कृष्णा का कहना है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता बस दिल में काम करने की इच्छा होनी चाहिए। समाज की बातों को इग्नोर करके महिलाओं को अपने काम पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने हाल ही में फरवरी माह में बेटी की शादी पर हुए खर्चे में अपने पति को फाइनेंशियली सहायता भी दी हैं।
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ड्रग एडिक्ट पति को छोड़कर खुद संभाला बेटी को
डीसी मॉडल स्कूल में अध्यापिका के पद पर कार्यरत पूनम ड्रग एडिक्ट पति के साथ डाइवोर्स होने के बाद से अकेली रह रही हैं और अपनी बेटी का पालन-पोषण कर रही हैं। पूनम ने बताया कि उनकी पंचकूला निवासी ड्रग एडिक्ट युवक के साथ कम उम्र में शादी कर दी गई। जो कि 7वीं पास था और कोई काम तक नहीं करता था। उनके पति का सच सामने न आ जाए इसलिए उनके ससुरालवालों ने दस दिनों में ही 2005 में उनकी शादी कर दी। शादी के बाद उसका पति उसके साथ मारपीट करता था और एक साल बाद बेटी के पैदा होने के बाद उसे भी पीटने लगा। इसके बाद उन्होंने तलाक लेकर अकेले रहने का निर्णय लिया और आज वह किराए के घर में रहकर स्वयं अपनी बेटी का पालन-पोषण कर रही हैं। पूनम का मानना है कि महिलाओं को अपराध सहन करने की बजाए उसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और अपनी पढ़ाई को व्यर्थ न गवां कर खुद अपना खर्च उठाना चाहिए।
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पति की नौकरी छूटने पर किया खुद का बिजनेस
बुढ़नपुर निवासी ऊषा शर्मा के पति भारतीय पेट्रोलियम कंपनी में बतौर मैनेजर काम करते थे। जिन्हें किसी कारणवश नौकरी से निकाल दिया गया। 4-5 माह तक पति को जॉब न मिलने के बाद उषा ने खुद का बिजनेस करने का सोचा और ब्यूटी पार्लर का 6 माह का डिप्लोमा किया। जिसके बाद दोस्तों की फाइनेंशियल सहायता और गोल्ड लोन लेने के बाद ऊषा ने मुंबई में ब्यूटी कोर्स करने के साथ-साथ अपनी ग्रेजुएशन कंपलीट की। वर्तमान में पंचकूला और मनीमाजरा में उनके दो ब्यूटी सैलून हैं। उषा ने बताया कि जब वह पार्लर का काम करने के लिए होम बुकिंग करती थी तो लोग उनके बारे में बहुत बातें बनाते थे लेकिन बातों की ओर ध्यान देने की बजाए उन्होंने अपने काम को अच्छा करने की कोशिश की।
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