नोएडा के ध्यानार्थ..........
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पत्र प्रकाशित करने के बाद मिली थी जान से मारने की धमकी
- साध्वी से पीएम और सीबीआई को भिजवाया था पत्र
- मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर था छत्रपति का गांव
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति सिरसा मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर दडबी गांव के रहने वाले थे। वह सिरसा से रोजाना शाम को निकलने वाला अखबार छापते थे। छत्रपति ने न केवल समाचार पत्र में चिट्ठी छापी बल्कि उस पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए पीड़ित साध्वी से पत्र को प्रधानमंत्री, सीबीआई को भेजने के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने उस पत्र को 30 मई 2002 के अंक में छापा था। इसके बाद उनको जान से मारने की धमकी दी गई। 24 सितंबर 2002 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए। इस बीच छत्रपति को जान से मारने की धमकियां मिलती रहीं। 24 अक्तूबर को छत्रपति शाम को ऑफिस से लौट रहे थे। उस समय उनकी गली में कुछ काम चल रहा था और वह उसी को देखने के लिए रुके हुए थे। इसी दौरान दो लोगों ने उन्हें आवाज देकर बुलाया और गोली मार दी। 21 नवंबर को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी।
कोर्ट में पेश होने के दिए थे आदेश
छत्रपति हत्याकांड मामले की सुनवाई दो जनवरी को पूरी हो गई थी। सीबीआई की विशेष अदालत के जज जगदीप सिंह ने दो जनवरी को आदेश दिए थे कि 11 जनवरी को आरोपी राम रहीम को कोर्ट में पेश किया जाए। इस पर हरियाणा सरकार के आग्रह पर पंचकूला डिस्ट्रिक अटार्नी पंकज गर्ग ने याचिका दायर की थी। याचिका के माध्यम से उन्होंने मांग की थी कि डेरा प्रमुख की पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से की जाए, जिससे कि हरियाणा के सभी जिलों में कानून व्यवस्था बनी रहे। इस पर आठ जनवरी को कोर्ट ने सुनारिया जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पेश होने के निर्देश दिए थे।
डेरा प्रमुख ने तीन लोगों के साथ मिलकर रची थी हत्या की साजिश
डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर किशन लाल, निर्मल सिंह और कुलदीप सिंह के साथ मिलकर साजिश रचकर पत्रकार छत्रपति की हत्या कराने का आरोप है। आरोप है कि बाइक पर आए कुलदीप सिंह ने गोली मारकर छत्रपति की हत्या कर दी थी, उसके साथ निर्मल सिंह भी था। छत्रपति ने अपने सांध्य कालीन समाचार पत्र पूरा सच में इस संबंध में बेनाम साध्वी का पत्र प्रकाशित किया था और पूरे मामले का खुलासा किया था। इस मामले में 2003 में एफआईआर दर्ज हुई थी और 2006 में मामला सीबीआई के सुपुर्द किया गया था। इन साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में ही राम रहीम सुनारिया जेल में 20 वर्ष कैद की सजा भुगत रहा है।