वन विभाग मोरनी का करवाएगा सेटेलाइट से सर्वे
- अपनी जमीन तलाशने के लिए तैयार किया प्रपोजल
- यहां दो सौ से अधिक लोग अवैध रूप से हैं काबिज
- सर्वे के बाद बढ़ सकती है कारोबारियों की टेंशन
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। वन विभाग ने मोरनी में अपनी जमीन को तलाशने की पूरी तैयारी कर ली है। वन विभाग ने इसके लिए सेटेलाइट सर्वे करने के लिए प्रपोजल तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दिया है। यदि प्रपोजल को मंजूरी मिल जाती है तो वन विभाग की जमीन पर वर्षों से कब्जा करके अपना व्यवसाय चलाने वाले सैकड़ों कारोबारियों की परेशानी बढ़ सकती है।
हरियाणा सरकार ने मोरनी, पंचकूला के वन और पहाड़ी क्षेत्र में अवैध निर्माण और खनन को कम करने के मद्देनजर, सरकार जल्द ही क्षेत्र में मेपिंग शुरू करने की संभावना है। इसके लिए पहले चरण में यहां के 14 गांवों को शामिल किया जाएगा। वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि विभाग सर्वे ऑफ इंडिया की मदद से मोरनी में जमीन का डिजिटल डेटा बनाने की भी योजना तैयार कर रहा है। पूरा प्रोजेक्ट सेटेलाइट कनेक्टिविटी का गवाह बनेगा। मेपिंग पूरी होने के बाद विभाग अतिक्रमण, भूमाफिया और अवैध निर्माण सहित अवैध गतिविधियों को नियंत्रित कर सकेगा। इसके अलावा, क्षेत्र में पेड़ काटने की घटनाओं की सूचना मिली है।
अवैध खन्न क्षेत्र में बड़ी समस्या
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि क्षेत्र में अवैध खनन एक बड़ी समस्या है और सरकार इसे नियंत्रित करने में विफल साबित हो रही है। क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि यहां से रेत और बजरी के ट्रक धड़ल्ले से लोड हो रहे हैं। खनन ठेकेदारों ने क्षेत्र को खोदकर रख दिया है। हालांकि, मोरनी को एक वन्यजीव क्षेत्र और एक पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया है। जहां वन विभाग की अनुमति के बिना कोई निर्माण नहीं हो सकता है। इसके बाद भी यहां बड़ी संख्या में लोग काबिज हैं। सूत्रों ने बताया कि मोरनी में लगभग 200 रेस्तरां और होटल मौजूद हैं और उनमें से ज्यादातर अवैध हैं। यह भी पता चला कि उनमें से ज्यादातर पंजीकृत भी नहीं हैं। उन्होंने न तो टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट से लैंड यूज (सीएलयू) सर्टिफिकेट लिया है और न ही वन विभाग से उनके पास अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) है।
50 हजार एकड़ भूमि का किया था अधिग्रहण
गौरतलब है कि मोरनी में वन विभाग ने पचास हजार एकड़ भूमि का अधिग्रहण कई दशक किया था, लेकिन वन विभाग के पास अभी तक भूमि का उचित रिकॉर्ड नहीं है। रिकार्ड के अभाव में वन विभाग क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर नजर नहीं रख पा रहा है। लेकिन सेटेलाइट सर्वे के बाद यह सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी।
सेटेलाइट सर्वे कराने को लेकर बैठक हो चुकी है और इसका प्रपोजल भी तैयार कर लिया गया है। जल्द ही इसे धरातल पर उतारा जाएगा और यहां वर्षों से काबिज लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। - अनिल हुड्डा, प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर।