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अबोहर से बेहद लगाव था अटल बिहारी वाजपेयी का

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अबोहर से बेहद लगाव था वाजपेयी को
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अर्जुन सिहाग के चुनाव प्रचार में सरकुलर रोड से किया था विशाल जनसभा को संबोधित
अमर उजाला ब्यूरो
अबोहर। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का अबोहर से भी पुराना लगाव रहा है। 1987 में जब चौ. अर्जुन सिहाग अबोहर विधानसभा से पार्टी प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे तो उस समय वाजपेयी ने उनके पक्ष में सभा को संबोधित किया था। वे जन-जन के नेता थे और साधारण कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग करने को प्राथमिकता देते थे।
1970 से वाजपेयी के संपर्क में रहे अबोहर के पुराने जनसंघी और बाद में भाजपाई बने ओम प्रकाश शर्मा बताते हैं कि सिहाग की चुनावी जनसभा को संबोधित करने के लिए जब अटल जी के आने का कार्यक्रम तय हुआ तो सरकुलर गली नं. 6 में स्थित डॉ. श्रीराम के घर से लेकर बाजार नं. 12 तक लंबा टैंट लगाया गया। हजारों लोग उन्हें सुनने के लिए उमड़े। अर्जुन सिहाग के तत्कालीन चुनाव प्रभारी रहे शर्मा बताते हैं कि उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करने वाले अबोहर के जनसंघियों में भगवानदास जैन, चांद कुमार जायसवाल, कश्मीरी लाल नारंग, सतनारायण अग्रवाल, चरणदास नागपाल, स्वामी लाल ठक्कर, देसराज बंसल, हरी सिंह गुम्बर और राजकुमार टंडन शामिल हैं। कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करने के लिए अटल जी उनके घर जाते थे। इसी कड़ी में वे ओम प्रकाश शर्मा, आर्य नगर निवासी मामन चंद और संत नगर निवासी हरी सिंह सोलंकी के घर पर जाते थे। अटल जी कार्यकर्ताओं को उनका नाम लेकर बुलाते थे जिससे साधारण से साधारण कार्यकर्ता में जोश का संचार होता था।
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शर्मा ने बताया कि जनसंघ के संस्थापक और पूर्व प्रधान बलराज मधोक के बाद जब अटल जी जनसंघ के पहले अध्यक्ष बनकर पहली बार अबोहर पहुंचे तो कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। अबोहर आकर भगवानदास जैन की कार में बैठकर लोगों के पास जाना और गांधी चौक में स्थित जनसंघ के आफिस में बैठ कर कार्यकर्ताओं से बैठकें करना अटल जी के लिए आम बात थी। शर्मा बताते हैं कि जनसंघ को आर्थिक तौर पर मजबूत करने के लिए अटल जी ने अबोहर से धन संग्रह अभियान शुरू किया। जिसमें उन्होंने दो लोगों से धन लेने का प्रण लिया जिसमें एक सबसे गरीब और दूसरा सबसे अमीर। उन्होंने बताया कि सबसे निर्धन व्यक्ति के पास धन लेने के लिए जब वे अटल जी को सड़क किनारे बैठे एक मोची के पास लेकर गए और उससे जनसंघ के लिए चंदे के रूप में कुछ पैसे मांगे तो पहले वह क्रोधित हो उठा क्योंकि वह कांग्रेसी विचारधारा का था। जब उसे बताया कि जनसंघ के प्रधान अटल बिहारी वाजपेयी खुद आपके पास चंदा लेने आए तो वह खुश हो गया और शायद पांच रुपये अटल जी को देकर उनके पैर छुए और उसके बाद खुद भी संघ के साथ जुड़ गया। अटल जी के साथ परछाई की भांति रहने वाले मूल रूप से जयपुर निवासी बड़ी-बड़ी मूंछों वाले शिव कुमार पारिक भी उनके साथ लगातार अबोहर आए। ओम प्रकाश शर्मा कहते हैं कि उनके निधन से देश को जो अपूर्णनीय क्षति हुई वह कभी पूरी नहीं की जा सकती। अटल जी युगों-युगों तक हमारे दिलों में राज करेंगे।



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