मोगा सिविल अस्पताल में हो रहे डोप टेस्ट शक के घेरे में
पॉजिटिव रिपोर्ट 10 दिन बाद नेगेटिव करार, दलालों के जरिये चल रहा खेल
दविंदर पाल सिंह
मोगा। सिविल अस्पताल में हथियार लाइसेंस धारकों के डोप टेस्ट की पॉजिटिव रिपोर्ट 10 दिन बाद नेगेटिव आने बाद टेस्ट शक के घेरे में हैं। हथियारों का दुरुपयोग रोकने के लिए डोप टेस्ट करवाना हथियार धारकों के लिए जहां सरदर्दी बन गया है, वहीं ये डोप टेस्ट कराने के लिए दलाल भी हाथ रंग रहे हैं। सेहत विभाग से डोप टेस्ट के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
यहां सिविल अस्पताल में जतिंदर सिंह नामक के नौजवान ने 30 जुलाई को रसीद नंबर 99512 जरिये 1500 रुपये जमा करके डोप टेस्ट कराया और सिविल अस्पताल ने उसकी डोप टेस्ट रिपोर्ट नशा करने की (पॉजिटिव) जारी की। इस नौजवान ने बताया कि वह निहंग है और कोई नशा नहीं करता। यहां तक कि पानी और खाने आदि के लिए मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल करता है। इस नौजवान के मुताबिक उसने सारा मामला एसएसपी गुरप्रीत सिंह तूर के ध्यान में लाने बाद इस नौजवान का शुक्रवार को 10 अगस्त को रसीद नंबर 106614 जरिये दोबारा डोप टेस्ट किया गया, जिसकी सिविल अस्पताल ने नशा रहित (नेगेटिव) रिपोर्ट जारी की। इस नौजवान ने दावा किया कि उससे शुक्रवार को कोई ओर अतिरिक्त फीस नहीं ली गई और उसके पास से यह अर्जी लिखवाई गई कि वह अपनी इच्छा के अनुसार दोबारा टेस्ट कराना चाहता है और वह नशा रहित है। इस से पहले इस निहंग ने एक कथित नशा करने वाले व्यक्ति से फोन पर संपर्क कर रिकार्डिंग की कि उसकी रिपोर्ट नेगेटिव कैसे आई है तो उसने आगे से कहा कि उसने एक दलाल को एक हजार रुपये ज्यादा दिए थे। यहां सिविल अस्पताल के रिकॉर्ड अनुसार के अब तक 1500 से अधिक डोप टेस्ट हुए हैं, जिनमें से अब तक करीब 150 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव है। सूत्रों अनुसार पॉजिटिव पाए जाने वाले हथियार धारकों या नया लाइसेंस लेने वालों के डोप टेस्ट की रिपोर्ट को नेगेटिव कराने के लिए नेताओं की सिफारिशें भी काम कर रही हैं। डोप टेस्ट कराने से पता लग जाता है कि हथियार लाइसेंस लेने वाला व्यक्ति शारीरिक एवं मानसिक तौर पर फिट है। वह नशे का आदी तो नहीं है। टेस्ट के जरिये यह पता लग जाता है कि व्यक्ति किस किस्म के नशे का सेवन करता है। इस टेस्ट की पुष्टि होने से हथियार धारक को सरकार की हिदायत के अनुसार लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकता और लाइसेंस लेने वाले का शारीरिक मेडिकल भी कराया जाता है। दूसरी तरफ जिला मजिस्ट्रेट दफ्तर में जो हथियार धारकों की रिपोर्टें पॉजिटिव आईं हैं, उनके हथियार लाइसेंस रिन्यू नहीं किया जा रहे और न ही नया हथियार लाइसेंस जारी किया जा रहा है। इसके अलावा पॉजिटिव रिपोर्ट वाले किसी हथियार लाइसेंस धारक को कोई नोटिस भी जारी नहीं किया गया।
डोप टेस्ट के काम पर पूरी सख्ती: सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ. सुशील जैन ने दावा किया कि डोप टेस्ट के काम पर पूरी सख्ती है। इस टेस्ट से नशा करने वाले व्यक्ति का पिछले 15 दिनों का पता लगता है। सिविल अस्पताल के मनोरोग माहिर डा. राजेश मित्तल ने दावा किया कि अस्पताल की टीम पूरी पारदर्शिता से काम कर रही है, जिसमें लोगों को साथ देना चाहिए। नशा करने वाले व्यक्ति में 15 से 20 दिन प्रभाव रहता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि नशा करने वाला व्यक्ति नशा करने से करीब 15 दिन बाद डोप टेस्ट करवाता है तो उसकी रिपोर्ट नशा रहित (नेगेटिव) संभव है। संबंधित व्यक्ति का आधार कार्ड, सरकारी फीस की पर्ची के बाद चीफ फार्मासिस्ट से एंट्री कराने बाद पर्ची को अस्पताल की लैब में जमा करवाकर पेशाब का नमूना देने बाद आंखों वाले डॉक्टर के पास से आंखों की भी जांच कराई जाती है।
फोटो कैप्शन - मोगा सिविल अस्पताल का द्रिश
फोटो कैप्शन - डोप टेस्ट लोगो