हड्डा रोडी नहीं हटवाने के विरोध में धरना
गांव कालेका के निवासियों ने डीसी दफ्तर के सामने की नारेबाजी
अमर उजाला ब्यूरो
बरनाला। नजदीकी गांव कालेका में हड्डा रोडी हटवाने के लिए मंगलवार को एक गुट ने डीसी दफ्तर के सामने धरना देकर प्रदर्शन किया। सोमवार शाम को गांव कालेका की हड्डा रोडी उठवाने को लेकर गांव में बने दो गुटों में खूनी टकराव होने से एक दर्जन के करीब लोग घायल हो गए थे और इस दौरान दोनों पक्षों में पथराव होने से वाहनों का काफी नुकसान हुआ था। मंगलवार को हड्डा रोडी नहीं उठवाने के समर्थन में दूसरे पक्ष के लोग सुबह 11 बजे जिला प्रबंधकीय कांप्लेक्स में धरना देने के लिए पहुंचे। इस प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। धरने में टकराव के दौरान हुए घायलों ने भी हिस्सा लिया। वहीं प्रदर्शनकारियों की संख्या को देखते हुए किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए डीसी कांप्लेक्स में भारी पुलिस फोर्स तैनात की हुई थी। ग्रामीणों ने डीसी बरनाला को मिलकर ज्ञापन सौंपा। डीसी धर्मपाल गुप्ता के आश्वासन देने के बाद ही धरना खत्म करवाया गया। धरनाकारियों ने कहा कि अगर हड्डा रोडी उठवाने संबंधी फैसला वापस नहीं लिया गया तो संघर्ष और भी तेज किया जाएगा।
हड्डारोडी के निर्माण को लेकर दो गुटों में पथराव
बरनाला। हड्डारोडी के निर्माण को लेकर गांव कालेके में दो गुटों ने एक-दूसरे के खिलाफ ईंट-पत्थर बरसाए, तेजधार हथियारों का इस्तेमाल किया और आगजनी की। इस टकराव के दौरान दोनों गुटों के 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इनमें एक महिला की हालत गंभीर है। उसे चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया है। सिख संगठन के नेता परमजीत सिंह कैरे की बाजू जल गई और दो ट्रैक्टरों को भारी क्षति पहुंचाई गई। घटना सोमवार शाम की है। इस पूरे प्रकरण के दौरान दोनों गुटों ने पुलिस को जिम्मेदार ठहराया है। एक गुट ने मंगलवार सुबह जिला प्रबंधकीय परिसर पहुंच धरना दिया। घायल हुए दोनों गुटों के सदस्यों में गुरचरण सिंह, बेअंत सिंह, मनजीत कौर, परमिंदर सिंह, गुरतेज सिंह, कुलदीप सिंह, परमजीत सिंह कैरे और गुरमीत कौर शामिल हैं।
एक पक्ष ने बताया कि गांव में पिछले 40 साल से हड्डारोडी बनी हुई है। जहां कुछ तत्वों ने कराहा लगाकर (जमीन को साफ कर) वहां निशान साहिब स्थापित कर नाजायज कब्जा करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि वे प्रशासन से कानूनी तौर पर मंजूरी लेकर हड्डारोडी की चारदीवारी करने के लिए ईंट और अन्य साजो-सामान के साथ पहुंचे थे। लेकिन वहां एक समुदाय ने माहौल को टकराव में बदल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने जमीन पर काबिज गुट की मदद की। उनके इशारे पर पुलिस ने उनके घरों में घुसकर उनके परिजनों से मारपीट की। हड्डारोडी के निर्माण का विरोध करने वाले गुट का नेतृत्व कर रहे रण सिंह रनीया, भोला सिंह नंबरदार, गुरतेज सिंह नंबरदार, पंच रूड़ सिंह, बाबू सिंह नंबरदार और पंचायत सदस्य मनिंदर कौर का कहना है कि जिस जगह पर पंचायत ने हड्डारोडी बनाई है वहां हड्डारोडी की जगह ही नहीं है। उस जगह के पास उनके करीब 50 परिवार कई साल से रह रहे हैं। यदि वहां हड्डारोडी का निर्माण होता है तो वहां बीमारी फैलने, बदबू फैलने और वहां खूंखार कुत्तों का जमावड़ा होने का भय लगा रहेगा।
डिप्टी कमिश्नर धर्मपाल गुप्ता का कहना है कि हड्डारोडी के बाबत जो दिशा-निर्देश हैं, उन्हें हर हालत में अमल में लाया जाएगा। यदि किसी को समस्या है तो उस पर दोबारा विचार किया जा सकता है, लेकिन किसी को अमन व कानून का उल्लंघन करने की किसी को इजाजत नहीं दी जा सकती।
एसपी सुखदेव सिंह विर्क का कहना है कि धरनाकारियों द्वारा पुलिस के खिलाफ जो आरोप जा रहे हैं, उसके बारे में जांच की जाएगी। यदि आरोप साबित हुए तो कार्रवाई की जाएगी।
फोटो कैप्शन: 10बीएनएलपी81आर: जिला प्रबंधकीय परिसर में धरना लगा पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए गांव कालेके का एक वर्ग।