नशा खत्म करने के लिए लिया फांसी का फैसला: अमरिंदर
पुलिस और सरकारी मुलाजिमों का डोप टेस्ट कराने के फैसले को सही बाताया
बोले- केंद्र की ओर से न्यूनतम समर्थन में विस्तार राजनीतिक ढकोसला
अमर उजाला ब्यूरो
जहान खेलां (होशियारपुर)। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सोमवार को पुलिस और सरकारी मुलाजिमों का डोप टेस्ट करने संबंधी अपने फैसले के हक में कहा कि एहतियात के तौर पर ऐसे टेस्ट सेना में भी होते हैं। सोमवार को यहां पुलिस भर्ती प्रशिक्षण केंद की पासिंग आउट परेड के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा तस्करों और माफिया पर राज्य सरकार का दबाव बढ़ने से नशों की सप्लाई लाइन टूटी है, जिस कारण नशे के आदी मजबूरन बनावटी नशे का सेवन करने लगे, जिसके नतीजे के तौर पर मौतें हुई हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि नशे की तस्करी के पहले जुर्म में ही फांसी की सजा दिए जाने के प्रस्ताव का उद्देश्य इस बीमारी को खत्म करना है। उन्होंने कहा कि पुलिस को नशा तस्करों के बारे में सूचना मिलने के बढ़ रहे मामले और बड़ी संख्या में नौजवानों का इलाज और पुनर्वास केंद्रों में जाना, सिद्ध करता है कि नौजवानों द्वारा बनावटी नशों के सेवन से हो रही मौतों से लोग भी चिंतित हैं। मोगा के पूर्व एसएसपी राज जीत सिंह के खिलाफ केस संबंधी पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम गठित की गई है और रिपोर्ट अदालत में सौंपी जा चुकी है। एक अन्य सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज जीत सिंह अपना पासपोर्ट अदालत में जमा करा रहा है, अब उसके देश से जाने का कोई खतरा नहीं है। पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ चल रहे आरोपों पर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विशेष जांच टीम ने रिपोर्ट अदालत में पेश कर दी है और मामला कोर्ट में है। एमएस स्वामीनाथन रिपोर्ट को पूरी तरह लागू करने की मांग को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके बिना किसानों की समस्याओं का हल संभव नहीं है। केंद्र सरकार की तरफ से फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में किया गया विस्तार राजनीतिक ढकोसला के अलावा और कुछ नहीं। राज्य में गैंग्स्टरों की समस्या पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार की तरफ से हर कीमत पर कानून की व्यवस्था को कायम रखा जायेगा। इस मौके पर कैबिनेट मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी और सुंदर शाम अरोड़ा और मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल भी उपस्थित थे।
फिरोजपुर से चंडीगढ़ पैदल गए युवक, नहीं मिले सीएम
नशे के खात्मे की बनाई रूपरेखा सौंपना चाहते हैं कैप्टन को
इलाके में नशे से 9 युवकों की हो चुकी है मौत, बोेले-अगर नहीं मिले मुख्यमंत्री तो चंडीगढ़ में देंगे धरना
अमर उजाला ब्यूरो
फिरोजपुर। गांव खाईफेमेकी में एक माह में नशे से मरे 9 नौजवानों की मौत के बाद नशे के खात्मे के लिए सक्रिय हुई गांव की शहीद ऊधम सिंह यूथ क्लब अब मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से मिलकर नशे के खात्मे की रूपरेखा सौंपना चाहते हैं। क्लब के सदस्य चंडीगढ़ सीएम से मिलने गए थे, लेकिन सीएम ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया, निराश होकर वापस लौट आए।
मुख्यमंत्री से मिलने के लिए क्लब के सदस्यों व 150 ग्रामीणों ने 30 जून को हुसैनीवाला बार्डर स्थित शहीदी स्मारक से पैदल मार्च चंडीगढ़ सीएम आवास तक शुरू किया, छह जुलाई को पैदल मार्च को मोहाली फेस छह में ही रोक लिया गया और मुख्यमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम के चलते क्लब के सदस्य मुख्यमंत्री से नहीं मिल पाए। क्लब के सदस्यों को सुरक्षा बलों ने मंगलवार या बुधवार को मुख्यमंत्री से मिलवाने का समय दिया है। पैदल मार्च का नेतृत्व कर रहे मनजिंदर सिंह भुल्लर ने बताया कि उनके पास एक ऐसा प्रस्ताव है जिसे अगर राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह सुन लेते हैं और उस पर अमल करते हैं तो प्रदेश में नशाखोरी रोकने में बहुत हद तक मद्द मिलेगी। इसके अलावा वह मुख्यमंत्री से मिलकर सीएम ऑफिस में एक कंट्रोल रूम बनाए जाने की बात करेंगे, जिस पर कोई भी व्यक्ति नशे के कारोबार से संबंधित जानकारी दे और उस पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की मानोटेरिंग सीएम ऑफिस से हो, इससे भी बहुत हद तक अवैध नशे के कारोबार पर अंकुश लग सकेगा।
सोमवार को प्रेस क्लब फिरोजपुर में पत्रकार वार्ता के दौरान मनजिंदर सिंह भुल्लर, रूपिदंर सिंह भूल्लर, मोड़ा सिंह अनजान, स्वर्ण सिंह नागपाल व सुखचैन सिंह ने बताया कि अगर सीएम ने समय नहीं दिया तो वह लोग अपनी पैदल यात्रा जो आठ किलोमीटर की रह गई है, वह मोहाली फेस छह से सीएम आवास तक शुरू करेंगे, और जब तक उनकी बैठक सीएम के साथ नहीं हो जाती वह लोग वहीं पर धरने पर बैठे रहेंगे।
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कैप्शन--फिरोजपुर में आयोजित प्रैसवार्ता में यूथ क्लब के सदस्यों पत्रकारों को जानकारी देते हुए।