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खन्ना मंडी में किसान जत्थेबंदियों कि मंडी में सब्जी लेकर पहुंचे किसानों के साथ धक्केशाही

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जत्थेबंदियों नेे किसानों की गाड़ियों की चाबियां निकालीं
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खन्ना मंडी में सब्जी लेकर पहुंचे किसानों के साथ की गई धक्केशाही
अमर उजाला ब्यूरो
खन्ना। किसान जत्थेबंदियों की ओर से 1 जून से लेकर 10 जून तक सब्जियों और दूध की सप्लाई रोकने के आह्वान के पहले दिन खन्ना में व्यापक असर रहा। किसान नेताओं ने धक्केशाही करते हुए मंडियों में सब्जियां और घरों में दूध की सप्लाई जबरदस्ती रोकी। इस पर दोनों पक्षों जमकर आपस में बहस हुई।
वहीं दूसरी ओर समराला मंडी में सब्जियां फेंकी गईं और श्री माछीवाड़ा साहिब में दूध सड़कों पर गिरा दिया गया। इस दौरान कुछ किसानों के वाहनों की चाबियां भी निकाल ली गई। आम लोगों ने हड़ताल का विरोध किया। सब्जी व दूध विक्रेताओं ने पुलिस से सुरक्षा की मांग की। खन्ना सब्जी मंडी में 5 बजे तक जो सब्जियां आ गई थीं, वो सुरक्षित रहीं। इसके बाद भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के जिला प्रधान नरिंदरजीत सिंह ईसड़ू की अगुवाई में किसान नेताओं ने मंडी में सब्जियां आने से रोकीं। इसे लेकर मंडी में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। डीएसपी जगविंदर सिंह चीमा और सिटी थाना 1 के एसएचओ अश्वनी कुमार के नेतृत्व में पुलिस फोर्स मंडी में आई और स्थिति को कंट्रोल किया गया। समराला में भाकियू राजेवाल ब्लाक प्रधान मुखत्यार सिंह सरवरपुर की अगुवाई में सब्जी मंडी में जाकर सब्जियां गिरा दी गईं और सब्जी बेचने से रोका गया। एसएचओ भूपिंदर सिंह ने किसान नेताओं को कानून हाथ में लेने से रोका और शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने के लिए कहा गया। श्री माछीवाड़ा साहिब में ब्लाक प्रधान सुखविंदर सिंह की अगुवाई में रोष प्रदर्शन के दौरान शर्मा डेयरी के शैंकी शर्मा की बाइक रोककर सारा दूध सड़क पर गिरा दिया गया।
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‘रोजाना के मुकाबले आधी आईं सब्जियां’
खन्ना मंडी में आम दिनों की तुलना में 50 प्रतिशत सब्जी कम आई है। बाहर से आने वाली सब्जी तो पहुंची लेकिन लोकल सब्जी की आमद बेहद कम रही। सब्जी कम आने का असर सब्जियों की दाम में देखने में मिला। आम दिनों की तुलना में सब्जियों के दाम दोगुने से भी ज्यादा थे। - बलविंदर कुमार, मंडी सुपरवाइजर
‘कम सब्जियां आने से कीमतें बढ़ीं’
हड़ताल से एक दिन पहले मंडी के माहौल को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। सुबह मंडी में आकर देखा तो सब्जी के रेट पहले के मुकाबले बहुत ज्यादा बताए जा रहे थे। वहीं आम दिनों की तुलना में सब्जी भी बहुत कम थी। किसान संगठनों की हड़ताल का अंजाम आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। मनू वर्मा, शहरवासी
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‘तब आढ़ती भी देते किसान का साथ’
किसान संगठनों के दस दिन तक सप्लाई बंद करने की बात ठीक नहीं है। इसका असर छोटे किसानों को पड़ेगा। हड़ताल एक दो दिन की होती तो आढ़ती भी किसान संगठनों का साथ देते। किसान संगठनों द्वारा किसी भी किसान से धक्का किया जाना गलत है। हड़ताल के पहले दिन मंडी में सब्जी की आवक का कुछ असर जरूर दिखा है। सब्जी के रेट बढ़े हैं वहीं खरीददारों की कमी आई है। - अवतार सिंह शेरगिल, प्रधान आढ़ती एसोसिएशन
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