कर्मचारियों की हड़ताल से 24 घंटे ठप रही रोडवेज बसें
ठेकेदारी सिस्टम का विरोध कर रहे हैं कर्मचारी
अबोहर।
पंजाब रोडवेज में ठेकेदारी प्रथा खत्म करने और पनबस की कर्ज मुक्त बसों को रोडवेज में शामिल करने जैसी कई मांगों के विरोध में पंजाब रोडवेज कर्मचारियों ने मंगलवार रात 12 बजे से बुधवार आधी रात तक बसों का संचालन ठप करके हड़ताल की। इससे एक ओर जहां निजी बस संचालकों की चांदी रही वहीं यात्रियों को भी भीड़भाड़ करके परेशानी का सामना करना पड़ा।
पंजाब रोडवेज वर्कर यूनियन के प्रांतीय प्रधान सांझी एक्शन कमेटी के कनवीनर मंगत खान ने बताया कि रोडवेज कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर काफी समय से सरकार के साथ बातचीत चल रही है। अब तक सरकार कोई भी मांग मानने को तैयार नहीं है। मांगों के बारे में मंगतखान ने बताया कि पंजाब रोडवेज में ठेका प्रथा बंद करना, ठेके पर रखे कर्मचारियों को पक्का करना, पनबस की 598 कर्ज मुक्त बसों को रोडवेज में शामिल करना, किलोमीटर स्कीम रद्द करना और 20 दिसंबर 2016 को माननीय पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से दिए गए फैसले को लागू करना है।
फैसले में अदालत ने 12210 बसों के परमिट शीघ्र लागू करने के आदेश जारी किए थे लेकिन उसके बाद भी सरकार ने लागू नहीं किए। मंगतखान ने बताया कि बुधवार को हुई 24 घंटे की हड़ताल में पूरे पंजाब में करीब 1700 बसों का संचालन बंद रहा और सांझी एक्शन कमेटी के अंतर्गत आती करीब 10 यूनियनों ने 18 डिपो में रोष व्यक्त करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र ही उनकी मांगों की ओर गौर नहीं किया तो वह संघर्ष और तेज करेंगे। इससे पूर्व 4 जनवरी को सभी यूनियनों ने हड़ताल का कार्यक्रम तय किया था लेकिन तब सरकार ने बातचीत का झांसा देकर हड़ताल रद्द करवा दी थी। मंगत खान ने बताया कि एक अनुमान के अनुसार इस 24 घंटे की हड़ताल से पंजाब रोडवेज को करीब डेढ़ करोड़ के नुकसान की संभावना है। वहीं हर रोज रोडवेज बसों में आरामदायक यात्रा करने वाले यात्रियों को निजी बसों में परेशानी का सामना करना पड़ा। इतना बस कुछ होने के बाद भी सरकार उनकी मांगों की ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है।
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