‘प्रसव के लिए आना तो कंबल साथ लाना
सरकारी अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड में कड़ाके की ठंड में ठिठुर रहीं माताएं
अमर उजाला ब्यूरो
मोगा।
सूबे में प्रसूति दर में सब से आगे माने जाने वाली स्थानीय सरकारी अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड में कड़ाके की ठंड से जच्चा-बच्चा ठुर रहे हैं। वार्ड के स्टाफ की बेरुखी कारण प्रसूति के लिए आ रही माताओं को कंबल नसीब नहीं हो रहे। परिजन घरों से कंबल लाने के लिए मजबूर हैं। वहीं एसएमओडॉ.राजेश अत्री ने दावा किया कि कंबलों की कमी नहीं। वार्ड के स्टाफ कंबल नहीं देने पर जवाब तलब किया जाएगा।
जच्चा-बच्चा वार्ड में हालत यह भी है कि कई बार तो एक बेड पर दो -दो प्रसूति महिलाओं को दिन काटना पड़ता है और कई बार तो महिलाओं को मजबूरी बस जमीन पर ही सोना पड़ता है। गांव चूहड़चक की बलजीत कौर ने बताया कि वह अपने रिश्तेदार प्रसव करवाने के लिए आई है। उसन स्टाफ की मिन्नतें की फिर भी कंबल नहीं दिया गया। वार्ड में 80 प्रतिशत महिलाओं के पास अपने निजी कंबल थे। गांव दुन्नेके निवासी गगनदीप कौर की माता सुखजीत कौर, सरबजीत कौर फिरोजपुर, कुलविंदर कौर ने आरोप लगाया कि स्टाफ से बार - बार मांगे जाने बाद भी कंबल नहीं मिले। नवजात बच्चों और मां को ठंड से बचाने के लिए खुद कंबल का प्रबंध कर रहे हैं।
सिविल सर्जन डॉ. मनजीत सिंह ने बताया सरकारी अस्पताल की प्रसूति दर निजी अस्पतालों से काफी आगे निकल गई है। जननी सुरक्षा योजना के तहत महिलाओं के गर्भवती होने से लेकर डिलीवरी होने से 42 दिनों बाद तक सरकारी अस्पतालों में महिलाओं को मुफ्त सेहत सुविधाएं प्रदान की जातीं हैं। उन्होंने बताया कि इस स्कीम तहत गर्भवती महिलाओं के ृअल्ट्रासाउंड, खून टेस्ट, वजन, बीपी और यूरीन आदि टेस्ट सरकारी अस्पतालों में मुफ्त किये जाते हैं। डिलीवरी होने के बाद महिलाओं को सहायता के तौर पर राशि भी दी जाती है, जो उनके बैंक खाते में सीधा जमा करवाई जाती है। गर्भवती महिलाओं को घर से लेकर आने-जाने की सुविधा भी प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि सेहत विभाग की ओर से चलाई जा रही इस स्कीम तहत गरीब, जरूरतमंद और पिछड़ी जातियों की महिलाओं को सरकारी संस्थाओं में प्रसूति करवाने पर गांवों की निवासियों को 700 रुपये और शहर की निवासियों को 600 रुपये सहायता राशि दी जाती है।