तीन दिन में तैयार होगा नई परिवहन नीति का ड्राफ्ट
- रोडवेज का चक्का जाम खत्म, बसों का संचालन शुरू, परिवहन मंत्री के साथ तीन घंटे चली बैठक
- 13 अप्रैल और 13 मई के समझौते को लागू करेगी सरकार, अमल न होने पर शुक्रवार को फिर चक्का जाम
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
हरियाणा सरकार ने रोडवेज कर्मियों के दबाव में एक बार फिर अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। परिवहन नीति-2017 के तहत आवंटित रूटों पर प्रदेश में कोई भी निजी बस नहीं चलेगी, जबकि पुरानी नीति के तहत आवंटित रूट पर निजी बसें चलती रहेंगी।
परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार के साथ यहां हरियाणा निवास में रोडवेज यूनियनों के साथ तीन घंटे तक चली बैठक में ये सहमति बनी है। पंवार ने यूनियन नेताओं को 13 अप्रैल और 13 मई को हुए समझौते भी लागू करने का आश्वासन दिया है। इसके बाद रोडवेज कर्मियों की आठों यूनियन का प्रतिनिधित्व कर रही रोडवेज बचाओ संघर्ष समिति ने हड़ताल वापस ले ली। इसके साथ ही सोमवार रात 12 बजे से प्रदेश के सभी डिपुओं में चला आ रहा रोडवेज का चक्का जाम भी खत्म हो गया।
बैठक में मंत्री के साथ नई परिवहन नीति का ड्राफ्ट तीन दिन में तैयार किए जाने की सहमति बनने के बाद संघर्ष समिति ने सभी रूट पर बसों का संचालन शुरू करने के निर्देश चालकों-परिचालकों को दे दिए हैं। बैठक के बाद पंवार ने कहा कि तीन दिन के अंदर नई परिवहन नीति का ड्राफ्ट तैयार कर लिया जाएगा। इसमें कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के सुझाव शामिल करेंगे। जब तक नई नीति लागू नहीं होती, तब तक पुराने रूटों पर निजी बसें चलती रहेंगी। नई नीति के तहत आवंटित रूट पर निजी बसें चलाने वाले संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। भविष्य में चक्का जाम की स्थिति न बने, इसे लेकर भी कर्मचारियों से बातचीत की गई है।
उधर, संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि पूर्व के समझौते लागू नहीं हुए और निजी बसें नए रूट परमिट पर चलीं तो शुक्रवार को फिर चक्का जाम किया जाएगा। रोडवेज यूनियनों की ओर से वार्ता में इंद्र सिंह बधाना, हरिनारायण शर्मा, दलबीर किरमारा, अनूप सहरावत, बाबू लाल यादव, आजाद मलिक, महाबीर मलिक शामिल हुए, जबकि सरकार की ओर से सीएम के प्रधान सचिव आरके खुल्लर व परिवहन विभाग के अधिकारी शामिल रहे।
3750 रूट पर ठप रही सेवाएं
रोडवेज के चक्का जाम के कारण चार हजार बसों के बेड़े में से 3750 बसों ने 200 रूटों पर सेवाएं नहीं दीं। इससे प्रदेश में परिवहन व्यवस्था चरमराई रही। हरियाणा के साथ ही हिमाचल, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी परिवहन सेवा पर असर पड़ा। चूंकि इन राज्यों सहित ही रोडवेज बसों में रोजाना 13 लाख यात्री सफर करते हैं। जिन्हें मंगलवार को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। रोडवेज की हड़ताल से सरकार को करीब चार करोड़ रुपये की चपत लगी है।