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छह सालों में

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छह वर्षों में 83 लाख से अधिक लोगों ने विरासत-ऐ-खालसा के किए दर्शन
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कैनेडियन प्रधान मंत्री स्टीफन हारपर ने भी किया था दौरा
श्री आनंदपुर साहिब।
पंजाब सरकार की तरफ से श्री आनंदपुर साहिब में बनाऐ गए विश्व प्रसिद्ध विरासत -ऐ -खालसा के निर्माण दौरान शायद किसी ने भी यह सोचा नहीं होगा कि यहां बनने वाला ‘विरासत -ऐ -खालसा’ जब विश्व की संगत के लिए खोला जायेगा तो यह इतना प्रसिद्ध हो जायेगा कि यहां विदेशी प्रधानमंत्री भी विशेष तौर पर ही नहीं पहुंचेंगे, बल्कि पंजाब की सरहद पर बसे श्री आनंदपुर साहिब में स्थित इस महान अजायब घर को पहले छह वर्षों के दौरान 83 लाख सैलानी देख चुके हैं जो पंजाब, पंजाबी और पंजाबियत के गौरवमई इतिहास के लिए बड़े गर्व की बात है। विदेशी मेहमानों की यदि बात की जाए तो पंजाब के समकालीन मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ सब से पहले साल 2005 में बरतानिया के प्रिंस चारलज और कैमिला पारकर ने निर्माण अधीन इस कांम्प्लेक्स का दौरा किया, जबकि उसके बाद 14 अप्रैल 2006 में मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस काम्प्लेक्स का एक हिस्सा संतों महापुरुषों की हाजिरी में संगत को समर्पित किया और बाद में पंजाब सरकार ने 25 नवंबर 2011 को यह प्रोजैक्ट आम सैलानियों के लिए खोल दिया। जिसतों बाद आज तक छह वर्षों में जहां 83 लाख से अधिक सैलानी इसको देख चुके हैं वहां ही आंकड़े यह भी बयान करते हैं कि दुनिया के आठवें अजूबे के तौर पर जाने वाला यह विरासत -ऐ -खालसा देश का सब से तेजी के साथ देखा जाने वाला अजायब घर भी बनता जा रहा है। माहिरों के यह मानना है कि यदि इसको देखने के लिए समय या सामर्थ्य निर्धारित न होती तो यहां आने वाले सैलानियों की संख्या कई गुणों तक अधिक होनी थी।
जबकि ख़ास और रोचक तथ्य यह है कि विरासत -ऐ -खालसा देखने वाले सैलानियों में से किसी ने भी नकारात्मक रुझान नहीं दिखाया। जानकारों का यह मानना है कि सिख कौम के इतिहास में यह पहला ऐसा अजायब घर है जहां रोजाना 7-8 हजार सैलानी दर्शनों के लिए आते हैं। इस महान काम्प्लेक्स की तुलना दुनिया के अजूबों के साथ की जाये तो आज के समय अंदर अगर कोई आठवां अजूबा देखना हो तो वह विरासत -ऐ -खालसा ही होगा। बता दें कि जहां विरासत-ऐ -खालसा को अब तक 83 लाख से अधिक देश और विदेशी सैलानियों ने देखा है, वहीं कई विदेशी नेताओं के अलावा कई देशों के एंबेसडर, कैनेडा के प्रधान मंत्री स्टीफन हारपर, मोरीशस के राष्ट्रपति, पंजाब के मुख्य मंत्री, पंजाब के राज्यपाल, भारत और अलग -अलग देशों के मेंबर पार्लियामेंटों ने भी इसके दर्शन किये हैं। और तो और हारपर को इस बात का गौरव भी प्राप्त हुआ है कि वह विरासत -ऐ -खालसा देखने वाले पहले प्रधान मंत्री बने हैं और उन्होंने इस प्राप्ति पर अपने आप को सब से अधिक भाग्यशाली व्यक्ति भी बताया था।
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यदि विरासत -ऐ -खालसा के दूसरे भाग की बात की जाये तो यह भाग पहले भाग की अपेक्षा कहीं ज्यादा आधुनिक और कहीं ज्यादा बढ़िया होगा। क्योंकि मौजूदा अति आधुनिक तकनीकों के साथ लैस इस भाग के में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की स्थापना के बाद आजादी के संघर्ष तक का समूचा इतिहास बहुत ही संजीदगी के साथ दिखाया जायेगा। प्रबंधकों अनुसार इस भाग के में बाबा बंदा सिंह बहादुर के संघर्ष, मिसल काल,महाराजा रणजीत सिंह, राष्ट्रीय आंदोलन, पंजाब आंदोलन आदि बुहत ही आधुनिक उपकरणों के साथ दिखाए जाएंगे जिससे युवा पीढी के लिए यह रहती दुनिया तक रौशनी मिनार बन सके।
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