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दिल्ली में सांसदों की सरकारी रिहायश की रिपयेर पर तीन सालों में खर्च हुये 133.49 करोड़ रूपये

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सांसदों के सरकारी रिहायश पर तीन साल में 133 करोड़ हुए खर्च
राजधानी दिल्ली में किराए का घर लेने से भी कई गुणा अधिक है रख-रखाव का खर्च
आरटीआई एक्टिविस्ट दिनेश चड्ढा ने किया खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
रोपड़।
देश के सांसदों के दिल्ली स्थित सरकारी निवास पर हर साल करोड़ों रुपये रिपेयर के नाम पर खर्च हो रहे हैं। सांसदों के रहने के लिए दिल्ली में 388 सरकारी बंगले हैं, जबकि 580 सरकारी फ्लैटों की व्यवस्था है। पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों के मुताबिक सांसदों के इन सरकारी रिहायशों पर 133.49 करोड़ रुपये रिपेयर के लिए ही सरकारी खजाने से खर्च किए गए हैं। रोपड़ के आरटीआई एक्टिविस्ट दिनेश चड्ढा ने बताया कि सांसदों के इन सरकारी निवास के रख-रखाव का खर्च भारत की राजधानी दिल्ली में किराए का घर लेने से भी कई गुणा अधिक है। चड्ढा ने बताया कि सूचना के अधिकार कानून के तहत यह जानकारी दो विभिन्न केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के कार्यालयों से हासिल की गई है। पहला कार्यालय संसद निर्माण मंडल-3 का है, जिसके आधीन संसद सदस्यों के 537 फ्लैट तथा 99 बंगले आते हैं। जबकि दूसरा कार्यालय संसद निर्माण मंडल-1 का है, जिसके आधीन 289 बंगले तथा 43 दो मंजिला फ्लैट आते हैं। वित्तीय वर्ष 2014-15 में इन मकानों की रिपेयर इत्यादि पर संसद निर्माण मंडल-1 ने 24.11 करोड़ रुपये तथा संसद निर्माण मंडल-3 ने 7.5 करोड़ खर्च किए हैं। इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2015-16 में संसद निर्माण मंडल-3 के सदस्यों के घरों के रख-रखाव पर 21.3 करोड़ रुपये की राशि, जबकि संसद निर्माण मंडल-1 ने 32.56 करोड़ की राशि खर्च की। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2016-17 में संसद निर्माण मंडल-3 ने संसद सदस्यों के मकानों की मरम्मत तथा रख-रखाव पर 15.8 करोड़ रुपये जबकि संसद निर्माण मंडल-1 ने 35.22 करोड़ रुपये खर्चे।

कई संसद सदस्यों को दो-दो फ्लैट भी अलॉट
दिनेश चड्ढा ने बताया कि संसद निर्माण मंडल-3 के आधीन अधिकतर फ्लैट आते हैं, जिनमें कई संसद सदस्यों को दो-दो फ्लैट भी अलॉट हैं। जिस कारण इनमें से प्रति सदस्य का खर्च नहीं निकाला जा सकता। लेकिन संसद निर्माण मंडल-1 के आधीन अधिकतर बंगले ही आते हैं। अगर संसद निर्माण मंडल-1 द्वारा किए गए कुल खर्च तथा इसके आधीन आते 332 बंगलों तथा फ्लैटों की संख्या से प्रति सदस्यों के खर्च का औसत निकाला जाए तो वित्तीय वर्ष 2014 -15 में हर सांसद के घर की मरम्मत तथा रख-रखाव पर 7.2 लाख की राशि खर्च हुई। यह राशि प्रति माह 60 हजार रुपये है। इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2015-16 में संसद निर्माण मंडल-1 के प्रति सदस्य के निवास का वार्षिक खर्च 9.8 लाख रुपये बनता है। जो हर माह 81 हजार रुपये है। वित्तीय वर्ष 2016-17 निर्माण मंडल-1 की ओर से किए गए खर्च की राशि प्रति सदस्य 10.6 लाख बनती है, जो प्रति संसद सदस्य 88 हजार प्रति माह है।
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पीएम जन कल्याण पर खर्चें जनता के ट्रैक्स से मिले रुपये
दिनेश चड्ढा ने आरोप लगाया कि भारत में जहां असंख्य लोग बिना छत के खुले आसमान के नीचे भयंकर सर्दी में रातें गुजारते हैं। उसी देश के भुखमरी के आंकड़े भी सुर्खियों में रहते हैं। ऐसे में देश के सांसदों के सरकारी घरों की रिपेयर तथा रख-रखाव का खर्च प्रति सदस्य प्रति माह 88 हजार रुपये होना चिंता का विषय है। इससे पहले भी संसद सदस्यों की टीए तथा डीए के रूप में फिजूल खर्च का खुलासा किया जा चुका है। उन्होंने देश के प्रधानमंत्री को इस फजूल खर्च पर तुरंत कदम उठाने की अपील की है। इसके अलावा देश वासियों से टैक्स के रूप में वसूली गई धनराशि जन कल्याण के लिए प्रयोग करने की मांग की है।
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