नरमे की पैदावार ने घटाया दलहनी फसलों का रकबा
पिछले वर्ष की तुलना में मात्र 1500 हेक्टेयर में हुई बिजाई
अमर उजाला ब्यूरो
अबोहर।
बीते वित्त वर्ष में नरमा कपास की अधिक पैदावार से किसानों ने दलहनी फसलों की बिजाई कम कर दी है। गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष पूरे जिले में तीन हजार हेक्टेयर दलहनी फसलों की बिजाई कम हुई है।
सरकार और कृषि विभाग की ओर से पारंपरिक फसली चक्र से बाहर निकल कर दलहनी फसलों की बिजाई करने के लिए गत वर्ष नरमा पट्टी के किसानों ने पूरे जिले में करीब 4500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में दलहनी फसलों की बिजाई की थी। इसमें से चार हजार हेक्टेयर अरहर की फसल भी शामिल थी। इसके साथ ही विभाग ने दावा किया था कि अगर मौसम अनुकूल रहा तो फाजिल्का जिले सहित पूरे पंजाब में दालों की भारी पैदावार होगी। लेकिन अरहर की फसल पूरी तरह से खराब हो गई। इस करण इस वर्ष किसानों ने सिर्फ मूंग की बिजाई की है। इससे पूरे जिले में दलहनी फसलों का रकबा घटकर मात्र 1500 हेक्टेयर रह गया है।
जिला कृषि अधिकारी सतिंद्र कौर ने बताया कि पिछले वर्ष किसानों ने अधिक पैदावार देने वाली मानक और एएल-15 किस्म की अरहर की बिजाई की थी। लेकिन कुछ कारणों से अरहर की पैदावार नहीं हुई। उन्होंने कहा कि दालों की खेती में किसानों को कम लागत में अधिक पैदावार मिलती है और पिछले वर्ष जिले में पहली बार इतने बड़े क्षेत्र में दालों की खेती की गई थी। उन्होंने बताया कि सरकार ने दलहनी फसलों को बढ़ावा देने के लिए किसानों को अरहर व मूंग का बीज छूट पर उपलब्ध कराया था। लेकिन इस वर्ष करीब 1500 हेक्टेयर में मूंग की फसल बीजी गई है, जबकि अरहर की बिजाई न के बराबर हुई है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष नरमें का रकबा करीब दो गुना हुआ है और मौसम अनुकूल रहा तो अगले वर्ष यह रकबा और बढ़ने की पूरी उम्मीद है।