नहर में दूसरी बार दरार, सैकड़ों एकड़ धान की फसल डूबी
खेतों में भरा बारिश का पानी, पीड़ित किसानों ने की मुआवजे की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
मोगा।
कस्बा कोट ईसेखां से जसपुर गहिली वाला आगावाह नहर की बुर्जी नंबर 21 के पास दरार पड़ने से सैकड़ों एकड़ धान की फसल डूब गई। बीते 24 घंटे से रुक रुक कर हो रही बारिश की वजह से खेत पानी से भर गए।
कोट ईसेेखां से जसपुर गहिली वाला आगावाह नहर बुर्जी नंबर 21 के पास से 14 जून की रात भी दरार पड़ने से कई किसानों की फसल बर्बाद हो गई थी। सिंचाई विभाग ने पीछे से पानी बंद करवा नहर में आई दरार बोरियों भर कर बंद करवा दी थी। बीते 24 घंटों से रुक-रुक हो रही तेज बारिश से नहरों में पानी बढ़ गया है। अब इस नहर में दोबारा उसी जगह से दरार पड़ने से सैकड़ों एकड़ खेतों में पानी भर गया और धान की फसल डूब गई।
हरबंस सिंह भुल्लर व अन्य किसानों ने सिंचाई विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते कहा कि यह दरार रेतीली मिट्टी से भरी गई थी और पानी से बोरियों में से यह रेतली मिट्टी निकल गई। दोबारा दरार पड़ने से उनकी फसल का नुकसान हो गया है। पीड़ित किसानों ने बताया कि सोमवार देर रात को एसडीओ कुलदीप सिंह को फोन कर सूचित किया गया कि नहर में दरार पड़ रही है। किसान हरबंस सिंह ने बताया कि मंगलवार सुबह 10 बजे तक विभाग का कोई भी अधिकारी नहर टूटने वाली जगह पर नहीं पहुंचा। पीड़ित के अनुसार उनका पहले ही करीब 50 हजार का नुकसान हो चुका है। अब नहर का पानी उनके खेत में बने मोटर वाले कमरे में भी आ गया है। इस वजह से हर समय कमरा गिरने का खतरा है। उन्होंने बताया इससे संबंधित वह डीसी को 19 जून को भी एक दर्खास्त देकर आए हैं कि इस नहर का कोई योग्य हल करवाया जाए। उसने प्रशासन और सरकार से मांग की कि उनके हुए नुकसान संबंधी उन्हें मुआवजा दिलाया जाए और नहर को साफ करवा कर पक्का करवाया जाए।
एसडीओ कुलदीप सिंह ने कहा कि बोरियों में मिट्टी भरने से कुछ नहीं हुआ। बारिश ज्यादा होने के बाद नहर में पानी बढ़ने से दरार पड़ी है। उन्होंने कहा कि पानी पीछे से बंद करवा दिया है और विभाग की टीम पहुंच गई है, दरार बंद करवा दी जाएगा। किसान नेता गुलजार सिंह घल्लकलां ने कहा कि बारिश ज्यादा पड़ने से धान की लगवाई में तेजी आ गई है। इस बार मजदूरों की कमी से किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
फोटो कैप्शन - कोट ईसेखां से जसपुर गहिली वाला आगावाह नहर बुर्जी नंबर 21 के पास नहर में पड़े फाड़ के साथ खेतों में खड़ा पानी