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कर्मचारियों को मिलेंगे सस्ते फलेट्स

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सस्ते फ्लैट भी यूटी कर्मचारियों को पड़ेंगे महंगे
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-बोर्ड की मीटिंग में आएगा एजेंडा, रेट किए जा सकते हैं कुछ कम
- सेक्टर 53 में 1200 एकड़ जमीन पर कर्मचारियों के लिए बनने हैं 900 फ्लैट्स
- प्रशासक की अगुवाई में यूटी प्रशासन के आलाधिकारियों की हुई उच्चस्तरीय बैठक
अनुभव अवस्थी
चंडीगढ़। यूटी कर्मचारियों के लिए स्व-वित्तपोषित आवास योजना के तहत भूमि के आवंटन के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद 900 फ्लैट्स बनने का रास्ता तो साफ हो गया है, लेकिन 10 साल बाद ये फ्लैट्स अब कर्मचारियों को काफी महंगे पड़ रहे हैं। प्रशासक के निर्देश पर चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की ओर से कर्मचारियों को सस्ते फ्लैट्स मुहैया करने की पहल की गई है। सूत्र बताते हैं आगामी 6 मार्च को बोर्ड की होने वाली बैठक में इसके लिए एजेंडा जाया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक यूटी कर्मचारियों को फ्लैट्स मुहैया कराने केलिए केंद्र की ओर से जमीन के लिए हरी झंडी मिलने के बाद रेट को लेकर असमंजस की स्थिति बनी है। 10 साल पहले यह स्कीम लागू हुई थी, उस दौरान कलेक्टर रेट काफी कम था। अब यह रेट आसमान छू रहा है। सूत्रों की मानें तो इतने अधिक रेट में कर्मचारी फ्लैट्स लेने को तैयार भी नहीं हैं। बुधवार को प्रशासक वीपी सिंह की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय मीटिंग हुई, जिसमें फ्लैट्स के रेट कम करने पर विचार हुआ। मीटिंग में फ्लैट्स के रेट कम करने को लेकर आगामी बोर्ड की मीटिंग में एजेंडा लाने पर सहमति बनी है। बोर्ड में ही फ्लैट्स के रेट फाइनल होंगे।
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यह है फ्लैट्स की अनुमानित लागत
प्रशासन की ओर यूटी इंप्लाइज के लिए सेक्टर 53 में 1200 एकड़ जमीन पर 900 फ्लैट्स बनवाने का निर्णय लिया गया था। पहले इसे पांच फ्लोर तक बनवाने का निर्णय था। बाद से इसे 6 फ्लोर कर दिया। करीब 2 हजार स्क्वायर फुट में थ्री ब्रेड रूम, 14 सौ स्क्वायर फुट में टू ब्रेड रूम, और 9 सौ स्क्वायर फुट पर वन ब्रेड रूम का निर्माण कार्य होना है। वर्तमान में थ्री ब्रेड रूम की अनुमानित कीमत 1 करोड़ 50 लाख से अधिक बताई जा रही है। जबकि टू ब्रेड रूम की कीमत एक करोड़ 30 लाख और वन ब्रेड रूम की कीमत 75 लाख के आसपास बताई जा रही है।
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बीते दिसंबर मिली थी मंजूरी
साल 2008 में यूटी कर्मचारियों के लिए सेल्फ फाइनेंसिंग हाउसिंग स्कीम लांच की गई थी। इस स्कीम के तहत 61.5 एकड़ जमीन को हाउसिंग बोर्ड को अलॉट करने की बात कही गई थी। लेकिन गृह मंत्रालय ने इससे इनकार कर दिया था। इस स्कीम के तहत हाउसिंग बोर्ड के 3930 आवंटियों के 57 करोड़ रुपये बोर्ड के पास बीते 7 साल से जमा हैं। बताया जाता है कि बोर्ड के पास मौजूदा समय में 1167 एकड़ जमीन पड़ी है। जबकि इंप्लाइज यूनियन के लिए केवल 67 एकड़ जमीन की जरूरत है। बीते दिसंबर माह में कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इंप्लाइज स्कीम के आवंटियों को फ्लैट्स मिलने का रास्ता साफ हो गया था।
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