...जब प्रिया बनीं श्वेता तिवारी ने दर्शकों से पूछा- क्या तलाक लेना सही फैसला है
नाटक ‘जब वी सेपरेटिड’ में तलाक की बजाय संबंधों को सुधारने के श्वेता तिवारी के संदेश ने जीता दर्शकों का दिल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सात जन्म तक साथ जीने मारने की कसम लेने वाले कपल के रिश्तों की मौत है तलाक। वर्तमान समय में आपसी रिश्तों में थोड़ी सी दरार के बाद पत्नी-पति तलाक लेने को उतारू हो जाते हैं। क्या पति-पत्नी आपसी बातचीत और प्यार की गुंजाइश से संबंध को सुधार नहीं सकते। तलाक का फैसला क्या सही है.. इस सवाल को मंच पर किसी और नहीं बल्कि मशहूर अभिनेत्री एवं बिग बॉस विजेता श्वेता तिवारी ने ट्राइसिटी के दर्शकों से पूछा। साथ ही दर्शकों को तलाक नहीं खुशहाल विवाहित जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। श्वेता अभिनेत्री प्रिया के किरदार में दर्शकों से टैगोर थियेटर सेक्टर-18 में ‘जब वी सेपरेटिड’ में रूबरू हुई। मशहूर अभिनेता राकेश बेदी निर्देशित इस नाटक का मंचन शनिवार को हुआ। इसमें अभिनेत्री श्वेता तिवारी एवं अभिनेता राहुल भुचर ने मुख्य भूमिका निभाई।
कहानी ने दिया तलाक नहीं खुशहाल जीवन जीने का संदेश
नाटक का उद्देश्य उन नव दंपतियों के दांपत्य जीवन को खुशहाल करना है जो वर्तमान समय में छोटी छोटी बातों को लेकर आपसी रिश्तों को खराब कर रहे हैं। इसमें दिखाया गया कि थोड़ी सी समझदारी से हर बात से आसानी से निपटाया जा सकता है। नाटक में संबंधों को समाप्त करना या तलाक देना रास्ता नहीं है। वहीं राकेश बेदी ने उन लोगों का दर्द भी उकेरा जो अपनी वृद्ध अवस्था में तन्हा जीवन यापन कर रहें है। उन्हाेंने यह बताने की कोशिश की कि वृद्धों की हम अनदेखी न करें। वह भी सबसे घुलना मिलना और बातें करना चाहते हैं। अकेले जीवन काटना सरल नहीं होता है। उन्होंने
नाटक में दिखाया कि प्रिया और संजय साहनी के दांपत्य जीवन की कड़वाहट हमेशा के लिए आपसी संबंधों को खराब कर देती है। हालांकि कोर्ट तलाक से पहले छह महीने उनको फिर से सोचने के लिए कहती हैं। लेकिन वर्तमान समय में अन्य कपल की तरह वो छह महीने दोनाें बेहद जल्दी खत्म होने की कामना करते हैं ताकि जल्दी से तलाक मिले। इस तलाक के बीच इन दोनों की बेटी मेघा सबसे ज्यादा प्रभावित होती है, नतीजन वह फेल हो जाती हैं। लेकिन वे दोनों तलाक के लिए उतारू हैं। नाटक में प्रिया के पड़ोसी मोंटी एक हंसमुख शख्स हैं जिन्होंने अपने मजाक से दर्शकों को खूब हंसाया। इसकी कहानी ने दर्शकों की खूब तारीफ बटोरी। अंत में नाटक ने तलाक की बजाए आपसी बातचीत एवं सहमति से रिश्तों को सुधारने की सलाह दी। दो घंटे के इस नाटक ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
श्वेता तिवारी को देखने जुटी भीड़
टैगोर थियेटर सेक्टर-18 में रंगमंच के शौकीन दर्शकों का उत्साह उस समय देखने लायक था, जब उनकी फेवरेट अदाकारा श्वेता तिवारी मंच पर आईं। उनकी एक झलक पाने के लिए दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी। अभिनेत्री ने भी दर्शकों के प्यार को खूब सराहा।
बॉक्स
बिना कॉमेडी नहीं दे सकते गंभीर संदेश: राकेश बेदी
जब वी सपेरेटिड के निर्देशक मशहूर अभिनेता राकेश बेदी ने कहा कि टीवी-फिल्म हो या रंगमंच यदि किसी गंभीर विषय पर कोई संदेश या लोगों को अवेयर करना है तो उसमें इंटरटेनमेंट, कॉमेडी होना लाजमी हैं। क्योंकि गंभीर विषय को प्यार और इंटरटेनमेंट से दर्शकों तक आप आसानी से पहुंचा सकते हैं। उन्होंने अपने नाटक और वर्तमान समय में कला के बदले रूपों के बारे में विचार रखे।