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प्रख्यात संस् थानों में पीयू शामिल, मिलेंगे दस साल में एक हजार करोड़ रुपये

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देश के प्रख्यात संस्थानों में अब पीयू भी, दस साल में मिलेंगे एक हजार करोड़
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- हर साल विभिन्न विकास कार्यों के लिए मिलेंगे 100 करोड़ रुपये, बजट का टोटा हो जाएगा खत्म
- देश के 20 संस्थानों को यूजीसी के दायरे से बाहर कर विकास करेगी केंद्र सरकार
- छह संस्थानों का पहले हो चुका है चयन, अब छह अन्य घोषित संस्थानों में पीयू भी शामिल


फोटो---पीयू भवन

सुशील कुमार
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के लिए बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने इसका चयन प्रख्यात संस्थानों में किया है। इस लिस्ट में शामिल होने के बाद सरकार हर साल 100 करोड़ रुपए विभिन्न विकास कार्यों के लिए देगी। यह रकम 10 साल तक जारी की जाएगी। इस तरह से पीयू को एक हजार करोड़ रुपये मिलेंगे। माना जा रहा है कि इम्पावर्ड कमेटी फरवरी माह में आगे की प्रक्रिया शुरू करेगी। सूत्रों का कहना है कि भले ही प्रस्ताव पुराना हो, लेकिन इसका श्रेय पीयू वीसी प्रो. राजकुमार और चयनित कमेटी के दो अन्य सदस्यों को जाता है। अब आगे चुनौती है पीयू के लिए यह रकम जारी कराने की। हालांकि एक पेंच यह भी फंस सकता है कि चयनित छह संस्थानों में से यदि इस कमेटी ने दो से तीन ही संस्थान चुनने हुए तो फिर एक बार पीयू को नए मानकों के एग्जाम से गुजरना पड़ सकता है।

ये है योजना
केंद्र सरकार ने योजना बनाई है कि देश के 20 शिक्षण संस्थानों को यूजीसी के दायरे से बाहर कर उनका विकास किया जाए। इसके लिए वर्ष 2017 में सभी शिक्षण संस्थानों से आवेदन मांगे गए। 15 साल तक की योजनाएं शिक्षण संस्थानों को देनी थी। पीयू ने भी 300 पेज का प्लान तैयार किया और इम्पावर्ड कमेटी को भेजा। इस प्रस्ताव के बाद संबंधित संस्थानों के एक्यूएसी हेड समेत दो प्रोफेसर्स के साक्षात्कार लिए गए जो संस्थान की पूरी प्लानिंग पर था। इसमें पीयू से एक्यूएसी के निदेशक प्रो. एम राजीव लोचन भी पहुंचे थे।
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ये आए परिणाम
प्रथम चरण में एन गोपालस्वामी की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने 19 शिक्षण संस्थानों में से छह का चयन किया। इसमें तीन सरकारी व तीन प्राइवेट संस्थान शामिल थे। सरकारी संस्थानों में आईआईटी बैंगलुरु, आईआईटी बांबे, आईआईएस दिल्ली और निजी संस्थानों में बीआईटीएस पिलानी, मनीपाल एकेडमी, जीओ इंस्टीट्यूट शामिल हुए। अब दूसरी सूची में छह संस्थानों का चयन किया गया। इसमें पंजाब यूनिवर्सिटी का नाम भी शामिल है।

इन मानकों पर हुआ चयन
- वर्ल्ड व नेशनल रैंकिंग
- रिसर्च
- एकेडमिक स्टेट्स
- चल रहे कोर्सेज व शिक्षकों का अनुभव
- इंफ्रास्ट्रक्चर
- भविष्य की प्लानिंग
- सरकार से मिल रही मदद

दूर हो जाएगा फाइनेशियल क्रंच
पीयू का सालाना बजट 577 करोड़ का है। इसमें से 250 करोड़ रुपये केंद्र सरकार व लगभग 30 करोड़ रुपये पंजाब सरकार देती है। बाकी पीयू अपने स्रोत से कमाता है, लेकिन यह रकम कम है। नॉन टीचिंग व अन्य स्टाफ के वेतन के लिए दिक्कतें आती हैं। यूनिवर्सिटी जैसे-तैसे चल रही है, लेकिन यह दौड़ नहीं रही। लगभग हर साल पीयू को 70 से 80 करोड़ रुपये दौड़ने के लिए चाहिए। यह रकम मिले तो फिर रैंकिंग समेत कई मामलों में इसका अलग स्थान होगा। अब प्रख्यात संस्थानों में इसका नाम शामिल होने के कारण हर साल 100 करोड़ रुपये मिलेंगे। इस तरह बजट का टोटा खत्म हो जाएगा और पीयू को पंख लगेंगे।

ये होंगे भविष्य में काम
- पीजी करने वाले स्टूडेंट्स यहीं से पीएचडी करते नजर आएंगे।
- एमबीबीएस, एमडी, एमएस आदि कोर्स शुरू होंगे।
- इंजीनियरिंग के नए कोर्सेज शुरू होंगे।
- ज्वाइंट एंड ड्यूल डिग्री कोर्स शुरू होंगे।
- बीटेक-लिब, बीएससी-बीटेक आदि को जोड़ा जाएगा।
- न्यूक्लियर साइंस, स्पेश साइंस, मैटेरियल साइंस आदि पर विशेष कार्य होंगे।

फोटो---
वीसी ने ये की थी घोषणा
पीयू वीसी प्रो. राजकुमार ने सीनेट की बैठक में बजट के अभाव पर कहा था कि जल्द ही पीयू को बड़ी राहत मिलेगी। प्रख्यात संस्थानों में पीयू शामिल होगा। बता दें कि उसके कुछ दिन बाद ही पीयू का नाम इस सूची में शामिल हो गया।
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वर्जन---
फोटो--
नई लिस्ट में पीयू को छह प्रख्यात शिक्षण संस्थानों में जगह मिल गई है। उम्मीद है कि आगे के तय मानकों में भी हम खरे उतरेंगे। यदि रकम जारी होगी तो पीयू के लिए रुपये का संकट नहीं खड़ा होगा और पीयू को नई दिशा मिलेगी।
-एम राजीव लोचन, निदेशक, एक्यूएसी, पीयू
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