पीजीआई एमएस के खिलाफ 20 को यूनियन का प्रदर्शन
आरोप, पीजीआई के स्टाफ और फैकल्टी को नहीं मिल पा रहीं मेडिकल सुविधाएं
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पीजीआई में स्टाफ और फैकल्टी मेंबर के इलाज से जुड़े मुद्दों के हल नहीं होेने से काफी नाराजगी है। पीजीआई इंप्लाइज यूनियन के सदस्यों का कहना है कि जानबूझ कर उनके मुद्दे को हल नहीं किया जा रहा है। दो कमेटी उनकी मांगों पर मुहर लगा चुकी है। उसके बाद डिप्टी डायरेक्टर और डायरेक्टर भी सहमति जता चुके हैं, लेकिन मेडिकल सुपरिंटेंडेंट (एमएस) की ओर से उनकी मांगों को लटकाया जा रहा है। अपना विरोध जताने के लिए यूनियन के कर्मचारी 20 नवंबर को मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे। यूनियन के प्रेसिडेंट अश्विनी मुंजाल का कहना है कि उनकी सभी मांगे जायज हैं।
पीजीआई में काम करने के बावजूद उन्हें सुविधाएं नहीं मिल पातीं। किसी को स्टंट डलवाना हो या घुटने बदलवाने हो तो उन्हें पीजीआई की ओर से पूरे पैसे की अदायगी नहीं होती। पीजीआई स्टाफ मेंबर के यदि दो लाख रुपये खर्च हुए तो पीजीआई के नियमों के मुताबिक सिर्फ डेढ़ लाख की अदायगी होती है। पीजीआई में सीजीएचएस के नियम लागू नहीं होते।
यूनियन ने स्टाफ को जेनेरिक मेडिसिन दिए जाने का भी विरोध जताया है। उनका कहना है कि वे इसके लिए बाध्य नहीं है, फिर भी उन्हें जेनेरिक मेडिसिन दी जा रही है। इस बारे में गठित कमेटी ने भी यूनियन की मांगों का समर्थन किया है।
यूनियन प्रेसिडेंट मुंजाल का कहना है कि बेवजह उनकी मांगों को लटकाकर पीजीआई के करीब दस हजार लोगों को परेशान किया जा रहा है। यूनियन इसका 20 नवंबर को विरोध जताएगी। इस बारे में मेडिकल सुपरिंटेंडेंट से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।