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कर्मचारी आंदोलन टालने में जुटी सरकार

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कर्मचारी आंदोलन टालने में जुटी सरकार
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- सीएम के प्रधान सचिव ने तीन घंटे तक की सर्व कर्मचारी संघ के नेताओं से बैठक
- नरम नहीं पड़े कर्मचारियों के तेवर, चुनावी वादे पूरा करने पर अड़े
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
हरियाणा सरकार ने आंदोलन पर उतारू कर्मचारियों को साधने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। बुधवार को यहां सीएम के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर ने तीन घंटे तक सर्व कर्मचारी संघ के नेताओं के साथ उनकी मांगों पर माथापच्ची की, लेकिन नतीजा सकारात्मक नहीं निकल पाया। कर्मचारी नेता चुनावी वादे पूरा करने पर अड़े रहे, जबकि खुल्लर ने उन्हें जायज मांगें पूरी करने का आश्वासन देकर आंदोलन टालने और शांत करने का प्रयास किया।
संघ ने कर्मचारियों की मुख्य मांगों का समाधान न करने पर नाराजगी जताई है। कर्मचारी नेताओं ने खुल्लर से साफ कहा कि कर्मचारी अब आश्वासन नहीं, ठोस समाधान चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक मांगों का समाधान नहीं होगा, तब तक सर्व कर्मचारी संघ चैन से नहीं बैठेगा। दो जुलाई को रोहतक में राज्य स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन बुलाया गया है, इसमें अगली रणनीति का एलान किया जाएगा।
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ये रहे वार्ता में शामिल
संघ की ओर से राज्य प्रधान धर्मबीर फौगाट, वरिष्ठ उप प्रधान नरेश कुमार शास्त्री, महासचिव सुभाष लांबा, उप महासचिव जीवन सिंह, प्रेस सचिव इंद्र सिंह बधाना, वित्त सचिव राजेंद्र सिंह बाटू, केंद्रीय कमेटी के सदस्य शीलक राम मलिक शामिल रहे।

खुल्लर ने दिए आश्वासन
सीएम के प्रधान सचिव आरके खुल्लर ने प्रतिनधिमंडल को अनुबंध कर्मियों को नियमित करने की स्थायी नीति बनाने, वेतन में बढ़ोतरी, गैर कानूनी तरीके से आउटसोर्सिंग नीति-2 के तहत लगे अनुबंध कर्मियों को सीधे विभागों के वेतनमान पर रखने, कैशलेस मेडिकल सुविधा देने पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है।
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संघ ने रखी मांगें
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लांबा ने बताया कि प्रधान सचिव के समक्ष सभी प्रकार के पार्ट टाइम अनुबंध कर्मियों को नियमित करने की स्थायी नीति बनाने, समान काम के लिए समान वेतन, ठेका प्रथा समाप्त कर ठेकेदारों के मार्फत लगे कर्मियों को सीधे विभागों के रोल पर रखने, सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को वंचित सभी कर्मचारियों व पेंशनरों पर जनवरी 2016 से लागू करने, शिक्षा प्रेरक सहित छंटनी किए कर्मियों को वापस सेवा में लेने, खाली पड़े लाखों पद भरने, रोडवेज के रूट निजी हाथों में न देने और पंजाब के समान वेतन देने की मांगें रखी गईं।
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