पांव गवाएं फिर भी बने इंटरनेशनल खिलाड़ी
- पति-पत्नी ने बने मिसाल, मुकेश और पूनम का हुआ चयन
- जॉर्डन और चीन में खेले जाएंगे पैरा ओलंपिक गेम्स
संजीव पंगोत्रा
चंडीगढ़।
जिंदगी में आने वाली मुश्किलें व बाधाएं भी कभी-कभी मजबूत इरादाें के सामने अपना रास्ता बदल लेती हैं। ऐसी ही बाधाओं और मुश्किलाें का सामना करते आ रहे है चंडीगढ़ के मुकेश कुमार अपने खेल से अपने आप को निखार रहे हैं। इन्होंने अपने लक्ष्य का पाने के लिए अपनी विकलांगता को आड़े नहीं आने दिया। मुकेश का चयन एक नहीं दो-दो इंटरनेशनल प्रतियोगिताआें के लिए हुआ हैं। इनके साथ ही इनकी पत्नी पूनम जो पोलियों से ग्रस्त हैं का भी चयन हुआ हैं।
मुकेश और इनकी पत्नी पूनम पैरा ओलंपिक टेबल टेनिस के खिलाड़ी हैं। यह दोनाें जॉर्डन में 17-24 जून को होने वाली पैरा ओलंपिक टेबल टेनिस चैंपियनशिप में हिस्सा ले रहे हैं। इसके बाद मुकेश और पूनम चीन में 23-30 अगस्त तक खेली जानी वाली पैरा ओलंपिक टेबल टेनिस चैंपियनशिप में शिरकत कर रहे हैं। सिटी से सिर्फ ये ही दो खिलाड़ी है जिनका चयन भारतीय टीम के लिए हुआ है।
बच्चे को बचाते हुए खोया पैर :
मुकेश वर्ष 2003 में दिल्ली जाने के लिए प्लेटफार्म पर बैठे थे। इसी दौरान उनकी नजर एक बच्चे पर पड़ी, जिसकी मां उसे बैठाकर सामान खरीदने गई थी। इस दौरान बच्चा रेलवे ट्रैक पर पहुंच गया। बच्चे की जान जोखिम में देखते हुए मुकेश बच्चे को बचाने के लिए दौड़ पड़े। बच्चे को तो उन्हाेंने बचा लिया, लेकिन ट्रेन की चपेट में आकर इनका दायां पांव घुटने के नीचे से खराब हो गया। इस साहसिक कार्य के लिए मुकेश को राष्ट्रपति की ओर से गैलेंट्री अवार्ड भी मिल चुका है। मुकेश इस समय लॉ कर रहे है और टेबल टेनिस के पैरा खिलाड़ी हैं।
पोलियो हुआ पर नहीं छोड़ा हौसला :
मुकेश की पत्नी पूनम भी टेबल टेनिस की माहिर खिलाड़ी हैं। जब वह पांच साल की थी तो पोलियो से ग्रस्त हो गई और दायां पांव खराब हो गया था। इसके बावजूद भी इन्हाेंने हौसला नहीं छोड़ा और पढ़ाई के साथ-साथ टेबल टेनिस को करियर के रूप में चुना। पूनम इस समय मास्टर ऑफ लॉ कर रही है और टेबल टेनिस की खिलाड़ी भी है।