निपुण पजल एवं पैटर्न चैंपियनशिप में कक्षा 1 से 3 तक के विद्यार्थी लेंगे हिस्सा, चार चरणों में होगी प्रतियोगिता
संख्या व आकृति पैटर्न, मिलान, वर्गीकरण और तार्किक प्रश्नों के जरिए परखी जाएगी बच्चों की समझ
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। सरकारी स्कूलों की प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों में गणित को रटने के बजाय खेल-खेल में समझने की रुचि विकसित करने के लिए जिला प्रशासन और जिला मौलिक शिक्षा विभाग की ओर से निपुण पजल एवं पैटर्न चैंपियनशिप-2026 का आयोजन किया जा रहा है। निपुण हरियाणा मिशन के तहत होने वाली इस चैंपियनशिप में कक्षा 1 से 3 तक के 13,778 विद्यार्थी भाग लेंगे। प्रतियोगिता चार चरणों में होगी और इसमें बच्चों की तार्किक सोच, पैटर्न पहचानने, संख्या बोध और समस्या समाधान की क्षमता परखी जाएगी।
चैंपियनशिप उपायुक्त एवं मिशन डायरेक्टर सतपाल शर्मा के नेतृत्व और अतिरिक्त उपायुक्त विवेक आर्य के मार्गदर्शन में आयोजित की जा रही है। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सुमन चौधरी ने बताया कि बच्चों को स्वयं सोचकर पैटर्न समझने और सवाल हल करने के लिए प्रेरित करना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है। इससे गणित के प्रति डर कम होगा और बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा।
जिला एफएलएन समन्वयक एवं मिशन के नोडल अधिकारी असिन्द्र कुमार ने बताया कि चैंपियनशिप के लिए स्कूलों में पहले से साप्ताहिक पजल और पैटर्न वर्कशीट का अभ्यास कराया जा रहा है। इसी अभ्यास को अब प्रतियोगिता का रूप दिया गया है। प्रत्येक स्तर पर बच्चों की प्रगति को भी ट्रैक किया जाएगा।
चार चरणों में होगा चयन
विद्यालय स्तर: कक्षा 1, 2 और 3 के बच्चों की उनके स्तर के अनुसार पजल गतिविधियों के माध्यम से स्क्रीनिंग होगी।
क्लस्टर स्तर: प्रत्येक स्कूल से शीर्ष दो टीमों का चयन होगा।
खंड स्तर: क्लस्टर स्तर से चयनित शीर्ष दो टीमें खंड स्तर पर भाग लेंगी।
जिला स्तर: प्रत्येक खंड से शीर्ष दो टीमें जिला फाइनल में पहुंचेंगी।
पैटर्न से लेकर तार्किक सवाल तक
प्रतियोगिता में संख्या पैटर्न, आकृति पैटर्न, मिलान, वर्गीकरण, दृश्य पजल, संख्या बोध और तार्किक प्रश्न पूछे जाएंगे। ब्लॉक और जिला स्तर पर पहुंचने वाले बच्चों के लिए कौन बनेगा करोड़पति की तर्ज पर विशेष क्विज मंच तैयार किया जाएगा। इसमें बच्चे 50-50 और फोन ए फ्रेंड जैसी लाइफलाइन का भी इस्तेमाल कर सकेंगे।
रटने के बजाय समझने पर जोर
निपुण मिशन अधिकारी असिन्द्र कुमार ने बताया कि यह पहल रटंत प्रणाली के बजाय गतिविधि आधारित और आनंदपूर्ण अधिगम को बढ़ावा देगी। बचपन से ही गणितीय सोच मजबूत होने से आगे चलकर लर्निंग गैप कम करने में मदद मिलेगी। जिला स्तर पर विजेता टीमों को पुरस्कार और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया जाएगा।