डीएवी ने बिना मान्यता के किए हैं एमबीए में दाखिले, चांसलर को लिखा पत्र
- सीनेट सदस्य डॉ. सुभाष शर्मा ने लगाए गंभीर आरोप, छात्रों के दाखिले को मिली अनुमति निरस्त की जाए
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। डीएवी कॉलेज की विंग डीएवी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट की ओर से एमबीए में किए गए दाखिलों को सीनेट सदस्य डॉ. सुभाष शर्मा ने अवैध बताए हैं। उन्होंने कहा कि मान्यता से पहले दाखिले नहीं किए जा सकते और न ही दाखिले वैध हो सकते। इसके अलावा जिस कमेटी ने दाखिले वैध बताए हैं उसका कोरम भी पूरा नहीं था। हैरत वाली बात की है कि जिस कमेटी ने एमबीए में दाखिले के अनुमति प्रदान की है उसमें दो शिक्षक खुद मान्यता मांगने वाले संस्थान डीएवी के हैं। उन्होंने चांसलर वेंकैया नायडू से जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही किए गए दाखिलों को निरस्त करने को कहा है।
चिट्ठी में लिखा है कि डीएवी प्रबंधन द्वारा धोखाधड़ी की जा रही है। डीएवी कॉलेज में ही एक कमरे में एमबीए की कक्षाएं शुरू करने को मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के लिए मान्यता लेने को पीयू में अप्लाई किया गया था। जांच कमेटी ने वहां का दौरा किया तो कई कमियां निकलीं। उनकी पूर्ति के लिए कहा गया, लेकिन मानक पूरे नहीं हुए। तीन बार बैठक हुई और कॉलेज के दौरे भी हुए। आरोप है कि आखिर बैठक में छात्रों द्वारा लिए गए दाखिलों को कमेटी ने वैध कर दिया जबकि वह कमेटी में खुद थे उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं है। एक अन्य सदस्य को भी नहीं बताया गया। गुपचुप तरीके से यह खेल किया गया। यह गंभीर मामला है इसको लेकर जल्द से जल्द कदम उठाए जाएं।
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लगाए गए आरोप निराधार
हमने मान्यता नियमों के मुताबिक ली है। कमेटी ने ही मान्यता दी है। लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं।
-डॉ. सतीश शर्मा, निदेशक, डीएवी कॉलेज