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सेक्टर-38 में हत्या के वीडियो को पुलिस ने नहीं बनाया सबूत

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सतनाम हत्याकांड : वीडियो को पुलिस नहीं बना रही सबूत, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार
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सबहेड
सेक्टर-38 में की गई थी होशियारपुर के गांव खुरदा के सरपंच की हत्या, गैंगस्टर दिलप्रीत भी था शामिल

हाईकोर्ट का चंडीगढ़ पुलिस को आदेश, सबूत के तौर पर जोड़ें वीडियो, अगली सुनवाई पर जानकारी देने को कहा

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सेक्टर-38 स्थित गुरुद्वारे के सामने गत अप्रैल माह में दिनदहाड़े होशियारपुर के खुरदा गांव के सरपंच सतनाम सिंह की हत्या के मामले में बना एक वीडियो चंडीगढ़ पुलिस ने अब तक सबूत के तौर पर केस के साथ नहीं जोड़ा है। सोमवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस संबंध में दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए चंडीगढ़ पुलिस को कड़ी फटकार लगाई और उक्त वीडियो को सबूत के तौर पर रिकार्ड में लेने का आदेश दिया। साथ ही अगली सुनवाई पर हाईकोर्ट को जानकारी देने को भी कहा।
मृतक सतनाम सिंह के परिजनों की ओर से एडवोकेट महेंद्र कुमार के जरिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि चंडीगढ़ पुलिस इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस ने अब तक इस हत्याकांड के समय बनाया गया वीडियो सबूत के तौर पर रिकॉर्ड में नहीं लिया है। इस पर जस्टिस रितु बाहरी ने चंडीगढ़ पुलिस को फटकार लगाते हुए पूछा कि पुलिस इस वीडियो को रिकॉर्ड में ले क्यों नहीं ले रही जबकि यह हत्याकांड का सबसे अहम सबूत है। यह वीडियो यू-ट्यूब पर भी है तो साइबर एक्ट के तहत इसे बतौर सबूत रिकॉर्ड में लिया जाना बेहद जरूरी है। हाईकोर्ट ने पुलिस को यह वीडियो रिकॉर्ड में लिए जाने के आदेश दिए।
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उल्लेखनीय है कि सतनाम हत्याकांड की जांच चंडीगढ़ पुलिस की बजाय एनआईए या सीबीआई से करवाने की मांग को लेकर मृतक के भाई परमिंदर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। परमिंदर सिंह की ओर से एडवोकेट मोहिंदर कुमार ने हाईकोर्ट को बताया था कि सतनाम सिंह की हत्या के आरोपियों में कुख्यात गैंगस्टर विक्की गौंडर, गैंगस्टर दिलप्रीत सहित कुछ आतंकी भी शामिल हैं, जिनकी तलाश न सिर्फ पंजाब पुलिस बल्कि कई अन्य राज्यों की पुलिस भी कर रही है। इन आरोपियों पर कई लोगों की हत्या और लूटपाट के मामले दर्ज हैं। याचिकाकर्ता के पिता और चाचा की वर्ष 1990 में आतंकियों ने हत्या कर दी थी इसलिए सतनाम सिंह की हत्या के मामले की जांच एनआईए या सीबीआई जैसी किसी निष्पक्ष एजेंसी से करवाई जानी चाहिए। हाईकोर्ट को बताया गया था कि चंडीगढ़ पुलिस इस मामले में पूरी तरह से नाकाम रही है।
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